
'चुनावी बांड एक प्रयोग था...', RSS नेता दत्तात्रेय होसबाले बोले- समय बताएगा यह कितना फायदेमंद रहा
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि चुनावी बांड जांच-परख और विचार-विमर्श के साथ लाया गया और ऐसा नहीं है कि यह आज अचानक पेश किया गया है, यह (ऐसी योजना) पहले भी लाई गई थी. जब भी कोई बदलाव पेश किया जाता है, तो सवाल उठाए जाते है. सवाल तब भी उठाए गए थे जब ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें) पेश की गई.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने रविवार को कहा कि चुनावी बांड एक 'प्रयोग' था और समय बताएगा कि यह कितना फायदेमंद और प्रभावी रहा. आरएसएस अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (ABPS) ने रविवार को तीन साल के लिए 'सरकार्यवाह' (महासचिव) पद के लिए दत्तात्रेय होसबाले को फिर से चुना. चुनाव आयोग ने गुरुवार को चुनावी बांड का डेटा सार्वजनिक किया, जिसके खरीदारों में कई अरबपति बिजनेस टाइकून समेत कम नामी संस्थाएं शामिल हैं.
भारतीय स्टेट बैंक द्वारा ईसीआई को उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक स्टील टाइकून लक्ष्मी मित्तल से लेकर अरबपति सुनील भारती मित्तल की एयरटेल, अनिल अग्रवाल की वेदांता, आईटीसी, महिंद्रा एंड महिंद्रा और कम प्रसिद्ध फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज जैसी कंपनियां चुनावी बांड के प्रमुख खरीदारों में शामिल थे. चुनावी बांड के मुद्दे पर उठाई जा रही चिंताओं और दावों के बारे में पूछे जाने पर होसबाले ने कहा कि संघ ने अभी तक इस बारे में चर्चा नहीं की है क्योंकि यह एक 'प्रयोग' था.
'नई चीजें सामने आएंगी तो लोगों द्वारा सवाल उठाए जाएंगे'
उन्होंने कहा, 'यह जांच-परख और विचार-विमर्श के साथ लाया गया और ऐसा नहीं है कि चुनावी बांड आज अचानक पेश किया गया है, यह (ऐसी योजना) पहले भी लाई गई थी. जब भी कोई बदलाव पेश किया जाता है, तो सवाल उठाए जाते है. सवाल तब भी उठाए गए थे जब ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें) पेश की गई. यह स्वाभाविक है कि जब नई चीजें सामने आएंगी तो लोगों द्वारा सवाल उठाए जाएंगे. लेकिन समय बताएगा कि नई प्रणाली कितनी फायदेमंद और प्रभावी रही. इसलिए, संघ को लगता है कि इसे प्रयोग के लिए छोड़ दिया जाना चाहिए'.
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उन्होंने कहा, 'लोगों ने देखा है कि देश ने पिछले 10 वर्षों में कितनी प्रगति की है और यहां तक कि प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और राजनीतिक विचारकों ने भी दोहराया है कि वर्तमान सदी भारत की सदी है. कुछ अच्छा ही हो रहा होगा, तभी उन्हें ऐसा लगता है. वैसे भी, जनता अपना फैसला 4 जून (लोकसभा चुनाव मतगणना दिवस) को सुनाएगी'. इस सवाल पर कि क्या नागरिकता संशोधन अधिनियम में अंतिम तारीख को मौजूदा 31 दिसंबर 2014 से बढ़ाया जाना चाहिए, आरएसएस नेता ने कहा कि जरूरत पड़ने पर सक्षम अथॉरिटी द्वारा ऐसा किया जा सकता है.

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