
चुनावी दौर में कांग्रेस की उल्टी रवायत, 26/11 पर मनीष तिवारी ने यूपीए सरकार को बताया कमजोर
AajTak
चुनावी वक्त में सारी पार्टियां अपने अपने काम गिनाने में लगी हैं, लेकिन कांग्रेस की रवायत उल्टी होती जा रही है. कांग्रेस नेता अपनी पिछली सरकारों की नाकामियों को जनता के सामने पेश करने में लगे हैं. मनीष तिवारी की ताजा किताब में 26/11 के मुंबई हमले के दौरान यूपीए सरकार के रुख को कमजोर बताया गया है. 26 नवंबर 2008 अमेरिका के 9/11 के बाद दुनिया का सबसे बड़ा आतंकी हमला हर साल की तरह इस बार भी हमले की 13वीं बरसी से पहले उस घटना की चीरफाड़ और सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है. हर साल ये काम बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टियों का होता है, लेकिन इस बार हैरतअंगेज तरीके से कांग्रेस के बड़े नेता मनीष तिवारी ने ये मोर्चा संभाल लिया. देखिए ये एपिसोड.

आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









