
चीन के खिलाफ युद्ध के लिए अमेरिका इन दो देशों की मांग रहा मदद... आखिर क्या प्लान है?
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अमेरिका विश्व पटल पर खुद को उस देश के रूप में पेश करता है जिसने ताइवान को सुरक्षा की गारंटी दी है. लेकिन ये गारंटी बिना हित के नहीं है. अमेरिका ताइवान का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर है. ताइवान के बहाने अमेरिका एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्ज कराता रहता है. अब ऑस्ट्रेलिया और जापान से प्रश्न पूछकर अमेरिका ने फिर से कई थ्योरी को जन्म दे दिया है.
अमेरिका की सरकार ने अपने दो विश्वस्त सहयोगियों से जो सवाल पूछे हैं उसका जवाब दुनिया की अगली भू-राजनीतिक तस्वीर तय कर सकता है. अमेरिका ने पूछा है कि अगर ताइवान के मुद्दे पर चीन के साथ उसका युद्ध होता है तो इस समय इन दोनों देशों की भूमिका क्या होगी? गौरतलब है कि दोनों ही देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका के प्रमुख सहयोगी हैं और क्वाड (QUAD) गठबंधन के सदस्य हैं. भारत भी क्वाड का सदस्य है.
प्रश्न यह है कि अमेरिका अपने दो सहयोगियों से इस तरह का सवाल क्यों पूछ रहा है? क्या ताइवान के मुद्दे पर अमेरिका और चीन के बीच युद्ध जैसे टकराव की नौबत आने वाली है? क्या रूस-यूक्रेन, इजरायल-हमास और ईरान-इजरायल के बाद दुनिया एक और टकराव झेलने वाली है.
ताइवान के मुद्दे पर चीन और अमेरिका का टकराव बहुत पुराना है. अमेरिका दुनिया के नक्शे पर खुद को उस देश के रूप में पेश करता है जिसने ताइवान को सुरक्षा की गारंटी दी है. लेकिन ये गारंटी बिना हित के नहीं है. ताइवान रिलेशंस एक्ट (1979) के तहत अमेरिका ताइवान को रक्षा उपकरण और समर्थन प्रदान करता है ताकि वह अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सके.
ताइवान पर मुखर हो रहा है अमेरिका
ताइवान को लेकर अमेरिका की नीति "रणनीतिक अस्पष्टता" की रही है, यानी वह यह स्पष्ट नहीं करता कि ताइवान पर हमले की स्थिति में वह सैन्य हस्तक्षेप करेगा या नहीं. यह नीति चीन को रोकने और तनाव को नियंत्रित करने के लिए बनाई गई है. हाल के वर्षों में अमेरिका ने ताइवान को हथियारों की बिक्री बढ़ाई है. इसके अलावा क्वाड (QUAD) जैसे गठबंधनों के जरिए अमेरिका ने हिंद-प्रशांत में चीन के प्रभाव को संतुलित करने की कोशिश की है.
लेकिन अब अमेरिका मुखर होकर सवाल पूछ रहा है. फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार रक्षा मंत्रालय में टॉप डिप्लोमैट एल्ब्रिज कोल्बी क्षेत्रीय स्थिरता और चीन के बढ़ते सैन्य दबाव को देखते हुए इस क्षेत्र में ताइवान को सामूहिक रक्षा का संदेश देना चाहिए. उनका ये सवाल चीन के लिए भी एक संदेश हैं.

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