
चीन की फुस्स मिसाइल का पुर्जा-पुर्जा अलग करेंगे भारतीय साइंटिस्ट, रिवर्स इंजीनियरिंग से समझेंगे क्यों खास है PL-15E
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रिवर्स इंजीनियरिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी उत्पाद, उपकरण, या तकनीक (जैसे हथियार, मशीन, या सॉफ्टवेयर) को बनाए बिना उसके डिजाइन या संरचना को समझा जाता है. ऐसा करने के लिए प्रोडक्ट को खोला या तोड़ा जाता है. चीनी मिसाइल PL-15E के साथ भारत अब यही करने वाला है.
6-7 मई की रात को भारत ने पाकिस्तान और उसकी शह पर पल रहे आतंकवादियों को कयामत की रात का एहसास करा दिया. इस युद्ध के दौरान किसी भी पक्ष ने दूसरे के हवाई क्षेत्र को पार नहीं किया. कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 7 मई को पाकिस्तान और पीओके स्थित आतंकी कैंपों पर जवाबी हमला किया. इस दौरान पाकिस्तान ने भी अपने उन्नत लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया और मिसाइलों को तैनात कर दिया.
ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने अपनी वायुसेना के चार से अधिक स्क्वाड्रनों को तैनात किया था, जिनमें राफेल, एसयू-30 एमकेआई, मिग-29 और मिराज 2000 जेट शामिल थे. भारत के ये फाइटर जेट ब्रह्मोस और स्कैल्प-ईजी क्रूज मिसाइलों, जमीनी हमलों के लिए AASM हैमर गाइडेड बमों और हवा से हवा में मार करने के लिए मेटेयोर मिसाइलों से लैस थे.
पाकिस्तान ने 40 से ज़्यादा जेट विमानों से जवाबी हमला किया, जिसमें अमेरिका द्वारा सप्लाई किए गए F-16 वाइपर और चीनी J-10C और JF-17 थंडर फाइटर शामिल थे. इन फाइटर जेट्स ने चीन से खरीदे गए PL-15E एयर-टू-एयर मिसाइल से भारतीय विमानों को निशाना बनाने की नाकाम कोशिश की. पाकिस्तान ने फतह-II रॉकेट से भी भारत पर हमला करने की कोशिश की.
अब यह स्पष्ट है कि चीन ने किस तरह से इस जंग पर अपना असर डाला. भारतीय सैन्य अधिकारियों ने बीजिंग पर पाकिस्तान को एयर डिफेंस और सैटेलाइट सिस्टम से मजबूत करने का आरोप लगाया है. निश्चित रूप से चीन के हथियार भारतीय हवाई हमले के मुकाबले कमजोर साबित हुए और टारगेट को हिट नहीं कर पाए.
चीन की नाकामियों का मलबा
भारत और पाकिस्तान के बीच तीन दिनों से ज्यादा चले मिसाइल और ड्रोन हमले के बीच पंजाब के होशियारपुर जिले के कमाही देवी गांव के पास पाकिस्तान की नाकाम कोशिशों का मलबा मिला है. ये मलबा पाकिस्तानी वायुसेना द्वारा जे-10सी या जेएफ-17 जेट द्वारा दागी गई चीनी पीएल-15ई मिसाइल का है.

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