
चार साल पहले मासूम बच्ची के गाल पर किया था Kiss, अब आरोपी को अदालत ने किया बरी
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पुलिस ने साल 2021 में आरोपी के खिलाफ POCSO अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 (महिला की गरिमा भंग करने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) के तहत मामला दर्ज किया था.
महाराष्ट्र के ठाणे की एक विशेष अदालत ने साल 2021 में तीन साल की बच्ची के गाल पर चुंबन करने और उसके साथ छेड़छाड़ करने के एक मामले में एक आरोपी को बरी कर दिया है. अदालत ने कहा कि उसके इस कृत्य को आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता क्योंकि बच्चों से प्यार करने वाला कोई भी व्यक्ति स्वाभाविक प्रवृत्ति से ऐसा कर सकता है.
अदालत ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए कहा कि उसकी ओर से स्पष्ट आपराधिक इरादे का अभाव था और अभियोजन पक्ष उसके खिलाफ आरोप साबित करने में विफल रहा.
22 अगस्त को पारित एक आदेश में, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम से संबंधित मामलों की सुनवाई कर रही विशेष न्यायाधीश रूबी यू मालवंकर ने 54 वर्षीय ओमप्रकाश रामबचन गिरि को बरी कर दिया, जिन पर 9 जनवरी, 2021 को दो अलग-अलग मौकों पर नाबालिग लड़की को गले लगाने और चूमने का आरोप था.
पीटीआई के मुताबिक, पुलिस ने उनके खिलाफ POCSO अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 (महिला की गरिमा भंग करने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) के तहत मामला दर्ज किया था.
अदालत ने कहा, 'जिस कथित कृत्य के लिए आरोपी के खिलाफ मुकदमा चलाया गया था, उसे ऐसे कृत्य की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता जिसे सभी मामलों में अनुचित स्पर्श या बुरा स्पर्श कहा जा सके. संबंधित समय में पीड़िता की उम्र को देखते हुए, कोई भी व्यक्ति जो स्वाभाविक रूप से बच्चों का शौकीन है, उसे गोद में उठा सकता है, उसके गाल पर प्यार से चुंबन दे सकता है, जो आमतौर पर समाज में होता है.'
अदालत ने आगे कहा, 'हमारे जैसे देश में, इस तरह का व्यवहार - जब तक कि वह बच्चे को चोट न पहुंचा रहा हो या किसी अजनबी द्वारा बुरी नीयत से न किया गया हो - वास्तव में आपत्तिजनक या अपमानजनक नहीं माना जाता. इसलिए, इस मामले में भी, चूंकि आरोपी बिल्कुल अजनबी नहीं था क्योंकि वह उसी इलाके का निवासी था, इसलिए इसे पूरी तरह से आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता.'

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