
चार तीर्थस्थलों पर दुर्घटनाओं की जिम्मेदारी किसकी? NGT का उत्तराखंड सरकार से सवाल
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने उत्तराखंड सरकार को निर्देश दिया है कि वे चारों तीर्थ स्थलों पर दुर्घटनाओं की जांच करें. ट्रिब्यूनल ने अथॉरिटी से पूछा है कि इन तीर्थस्थलों पर संभावित दुर्घटनाओं की जिम्मेदारी किसकी है? एनजीटी का मानना है कि इन तीर्थ स्थलों पर तीर्थयात्रियों के लिए वहन क्षमता तय की जानी चाहिए.
एनजीटी ने उत्तराखंड के अधिकारियों से 4 तीर्थस्थलों पर दुर्घटना के मामले में जिम्मेदारी किसकी है यह बताने के कहा. एनजीटी ने राज्य के सचिव, पर्यावरण विभाग को 12 सितंबर को वर्चुअल मोड के माध्यम से अदालत में पेश होने को कहा है.
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने राज्य के पर्यावरण विभाग के सचिव से यह बताने को कहा है कि इस मामले में किसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा. एनजीटी केदारनाथ, हेमकुंड साहिब, यमुनोत्री और गोमुख के तीर्थ मार्गों पर घोड़ों के गोबर और उनके शवों सहित कचरे के अनियमित डंपिंग के बारे में एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी.
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तीर्थयात्रियों के लिए कोई वहन क्षमता तय नहीं
एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने कहा कि 10 मई, 2022 के राज्य सरकार के परिपत्र के अनुसार, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के लिए तीर्थयात्रियों की वहन क्षमता क्रमशः 16,000, 13,000, 8,000 और 5,000 निर्धारित की गई थी. एनजीटी ने कहा कि आज तक, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की पटरियों पर तीर्थयात्रियों के लिए कोई वहन क्षमता तय नहीं है, और उनके संबंध में कोई प्रतिबंध नहीं है.
संभावित दुर्घटनाओं की जिम्मेदारी किसकी?

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