
गोवा में करोड़ों की जमीन हड़पने वाली साजिश का पर्दाफाश, ED ने अटैच की 6.82 करोड़ की प्रॉपर्टी
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गोवा में मास्टरमाइंड मोहम्मद सुहैल से जुड़े जमीन हड़पने के बड़े मामले में ED ने अंजुना की 6.82 करोड़ की प्रॉपर्टी अटैच कर ली. यह मामला फर्जी बर्थ-डेथ सर्टिफिकेट, नकली सक्सेशन डीड और पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए जमीन ट्रांसफर कर करोड़ों की धोखाधड़ी का है.
डायरेक्टरेट ऑफ़ एनफोर्समेंट (ED), पणजी ज़ोनल ऑफिस ने गोवा के अंजुना, बर्देज़, गोवा में मौजूद एक अचल प्रॉपर्टी को प्रोविजनल तौर पर अटैच किया है. जिसकी कीमत प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के नियमों के तहत लगभग 6.82 करोड़ रुपये है. यह कार्रवाई गोवा में मास्टरमाइंड मोहम्मद सुहैल से जुड़े करोड़ों रुपये के ज़मीन हड़पने के मामले से जुड़ी है.
अटैच की गई प्रॉपर्टी अंजुना में सर्वे नंबर 504/10 वाला एक ज़मीन का टुकड़ा है, जिसका साइज़ 1950 वर्ग मीटर है. ED ने गोवा पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की चार्जशीट के आधार पर इस मामले में जांच शुरू की. दरअसल, क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन, गोवा में 23.07.2022 को इस संबंध में FIR नंबर 64/2022 दर्ज की गई थी. मोहम्मद सुहैल, मिसेज अंजुम शेख और नूरे फैजल भटकर को IPC, 1860 के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी और नकली डॉक्यूमेंट्स को असली बताकर इस्तेमाल करने जैसे तय अपराधों के लिए चार्जशीट में आरोपी बनाया गया है.
ED की जांच से मोहम्मद सुहैल के काम करने के खास तरीके का पता चला है. यह पता चला है कि आरोपी एक आदतन अपराधी है जो राज्य भर में ज़मीन हड़पने के कई मामलों में शामिल है, जिसके लिए गोवा पुलिस ने उसके खिलाफ कई FIR दर्ज की हैं.
इस मामले में, उसने शिकायत करने वाले के माता-पिता की ज़मीन का टाइटल धोखे से ट्रांसफर करने के लिए एक क्रिमिनल साज़िश रची, जिसका एकमात्र मकसद पीड़ितों को नुकसान पहुंचाना और फायदा उठाना था. जांच से पता चला कि आरोपियों ने एक नकली व्यक्ति बनाने के लिए नकली फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट तैयार किए और असली मालिकों के डेथ सर्टिफिकेट भी जाली बनाए.
इन नकली डॉक्यूमेंट्स का इस्तेमाल करके, एक व्यक्ति को अकेला कानूनी वारिस दिखाने के लिए एक नकली सक्सेशन डीड बनाई गई. इसके बाद, मोहम्मद सुहैल के साथी, नूरे फैजल भटकर के पक्ष में एक नकली पावर ऑफ अटॉर्नी बनाई गई. इसका इस्तेमाल 29.09.2010 की सेल डीड के ज़रिए प्रॉपर्टी को मोहम्मद सुहैल की पत्नी, श्रीमती अंजुम शेख को ट्रांसफर करने के लिए किया गया, जिससे अधिग्रहण की धोखाधड़ी की बात छिप गई. बाद में प्रॉपर्टी को 15.04.2011 को शेख सलीम नाम के एक व्यक्ति को बेच दिया गया.
ED की जांच में आगे पता चला कि जुर्म की कमाई को सही दिखाने के लिए प्रॉपर्टी की कीमत काफी कम करके दिखाई गई थी. शेख सलीम को सेल डीड में रजिस्टर्ड कीमत 50 लाख रुपये थी, जबकि जांच में 15.04.2011 को सही मार्केट कीमत 6.82 करोड़ रुपये तय हुई. इसके अलावा, जांच में रजिस्टर्ड कीमत से ज़्यादा कैश ट्रांजैक्शन का पता चला, जिसका इस्तेमाल मोहम्मद सुहैल ने लोन चुकाने और निजी खर्चों के लिए किया. अब इस मामले में आगे की जांच चल रही है.

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