
गाजा में शांति के लिए ट्रंप के पीस प्लान पर बातचीत जारी, हमास पर इजरायल को शक
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा के पीस प्लान को मिडिल ईस्ट में लंबे समय से चली आ रही आपदा को खत्म करने वाला प्लान बताया है. यह 2020 के अब्राहम समझौते की तरह आर्थिक और डिप्लोमैटिक प्रेशर पर आधारित है, लेकिन इसमें हमास को डिसआर्म करने और फिलिस्तीनी अथॉरिटी को कंट्रोल सौंपने का एजेंडा है.
इजरायल और हमास के बीच की जंग थमने का नाम नहीं ले रही. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भरसक कोशिशों के बावजूद अभी तक कुछ भी स्पष्ट नजर नहीं आ रहा. इस बीच इजरायल को संदेह है कि हमास सभी मृतक बंधकों को लौटाने का इच्छुक नहीं है.
इजरायली सूत्रों के मुताबिक, इजरायली सरकार को लगता है कि शायद हमास को मृतक बंधकों की लोकेशन पता ही ना हो. हमास शायद 28 मृतक बंधकों को हमास लौटा ही ना पाए.
सूत्रों का कहना है कि इजरायल ने ये अनुमान खुफिया रिपोर्टों के आधार पर लिया है. इसके साथ ही हमास और मध्यस्थों के संदेशों से भी ऐसा पता चला है.
बता दें कि 20 बंधकों के जीवित रहने का अनुमान है. इनमें से शायद दो की हालत गंभीर हो सकती है. मिस्र के शर्म अल-शेख में बंधकों की रिहाई और सीजफायर डील को लेक चल रही बातचीत के दौरान इजरायल ने युद्ध खत्म करने के लिए एक शर्त रखी, जिसमें जिंदा और मुर्दा सभी बंधकों को लौटाने की मांग की गई.
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी कैबिनेट को कई महीनों से पता है कि हमास को कुछ मृत बंधकों के ठिकाने के बारे में पता ही नहीं है.
बता दें कि ट्रंप ने कुछ रोज पहले 20-पॉइंट का गाजा पीस प्लान दिया था. यह इजरायल-हमास युद्ध को खत्म करने का नया प्रस्ताव है, जो सितंबर 2025 में पेश किया गया, जिसमें बंधकों की रिहाई, तत्काल सीजफायर, गाजा का पुनर्निर्माण और लंबे समय तक शांति पर फोकस करता है.

वेस्ट एशिया में छिड़े युद्ध में आज अमेरिका की तरफ से ऐसे संकेत आए हैं कि जैसे अमेरिका ईरान के सामने थोड़ा झुका हो. अमेरिका ने ईरान के एनर्जी और पावर प्लांट पर हमलों को फिलहाल टाल दिया है. लेकिन सवाल है कि क्यों? अमेरिका और इजरायल का गठबंधन युद्ध के 24 दिनों के बाद भी ईरान को पूरी तरह से झुका नहीं पाया है. शुरुआत में भले ही अमेरिका इजरायल को कामयाबी मिली हो. लेकिन अब तो ऐसा लग रहा है कि जैसे ईरान ने अपने ताकतवर बम युद्ध के इस हिस्से के लिए बचाकर रखे हों. इजरायल के न्यूक्लियर प्लांट तक ईरान के बम गिर रहे हैं. इजरायल का वर्ल्ड क्लास एयर डिफेंस सिस्टम फेल क्यों हो गया.

युद्ध के 24वें दिन आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला बड़ा ऐलान किया. ट्रंप ने कहा कि बीते 2 दिनों से हो रही बातचीत के बाद मैंने ईरानी पावर प्लांट्स पर 5 दिनों के लिए हमले करना रोक दिया है. गौरतलब है कि भारतीय समय से आज रात ही ईरानी पावर प्लांट्स पर हमला करने की ट्रंप की डेडलाइन पूरी हो रही थी. सवाल ये है कि क्या ट्रंप ने अचानक यू टर्न लिया है? अगर ईरान के साथ बीते 2 दिनों से बातचीत हो रही थी तो लगभग 2 दिनों पहले उन्होंने अल्टीमेटम क्यों दिया था? क्यों उन्होंने शक्ति से शांति की बात की थी? सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान के तेवरों के आगे ट्रंप एग्जिट रूट ढूंढ रहे हैं? ट्रंप के ऐलान से क्या युद्ध रुक जाएगा? क्या ईरान और इजरायल युद्ध रोकेंगे? ईरान की मीडिया के अनुसार अमेरिका से ईरान का कोई संपर्क नहीं है.

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए रोकने का निर्देश दिया, जिसका कारण दोनों देशों के बीच जारी सकारात्मक बातचीत बताया गया. डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान से पांच दिनों के भीतर डील हो सकती है. हालांकि, ईरान इन दावों को खारिज कर रहा है. इससे पहले अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को लेकर चेतावनी दी थी, जिस पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.

ईरान लगातार इजरायल को निशाना बना रहा है. यरुशलम में ईरान के हमले की आशंका को लेकर सायरन बजे. आनन-फानन में लोग बम शेल्टर की ओर भागे. ये सायरन ईरान से मिसाइल और ड्रोन हमलों की चेतावनी देते हैं. हमसे ले पहले कुछ मिनटों का ही समय होता है जिसमें इजरायली नागरिक अपने करीबी बम शेल्टर में तब तक शरण लेते हैं जब तक कि खतरा टल न जाए. देखें वीडियो.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.






