
खालिस्तानियों ने अमेरिका में हिंदू मंदिर की दीवारों पर लिखे भारत विरोधी नारे, भारत ने दी कड़ी प्रतिक्रिया
AajTak
कनाडा के बाद अब अमेरिका में भी हिंदू मंदिर को निशाना बनाया गया है. अमेरिकी शहर कैलिफोर्निया के नेवार्क में खालिस्तानियों ने स्वामीनारायण मंदिर पर भारत विरोधी नारे लिखे हैं. भारत ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है.
विदेशों में खालिस्तानियों की भारत-विरोधी गतिविधियां रुकने का नाम नहीं ले रही हैं. कनाडा के बाद अब अमेरिका में भी हिंदू मंदिर को निशाना बनाया गया है. अमेरिकी शहर कैलिफोर्निया के नेवार्क में खालिस्तानियों ने स्वामीनारायण मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधी नारे लिखे हैं.
खालिस्तानियों की इस हरकत पर सैन फ्रांसिस्को स्थित भारत के कांसुलेट जनरल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है, "कैलिफोर्निया के नेवार्क में SMVS श्री स्वामीनारायण मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधी नारे लिखने की हम कड़ी निंदा करते हैं. इस घटना से भारतीय समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं. हमने इस मामले में अमेरिकी अधिकारियों से तुरंत जांच और तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के लिए दबाव डाला है.
We strongly condemn the defacing of SMVS Shri Swaminarayan Mandir at Newark, California with anti-India graffiti. This incident has hurt the sentiments of the Indian community. We have pressed for quick investigation and prompt action against the vandals by the US authorities in…
भिंडरावाले का भी लिखा नाम
इससे पहले अमेरिका के हिंदू-अमेरिकिन फाउंडेशन ने घटना की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा था कि खालिस्तानियों ने कैलिफोर्निया के नेवार्क स्थित स्वामीनारायण मंदिर वासना संस्था को निशाना बनाया है. फाउंडेशन का कहना है कि पुलिस से शिकायत में इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि इस घटना की जांच हेट क्राइम से जोड़कर हो.
हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन की ओर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर की गई तस्वीरें में देखा जा सकता है कि स्वामीनारायण मंदिर वासना संस्था की दीवारों पर भारत और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ घृणित नारे लिखे गए हैं. दीवार पर खालिस्तानी आतंकवादियों का सरगना कहे जाने वाला जनरैल सिंह भिंडरावाले का भी नाम लिखा है. ऑपरेशन ब्लू स्टार के तहत जरनैल सिंह भिंडरावाले को मौत के घाट उतारा गया था.

अमेरिका और ईरान में इस समय टकराव देखने को मिल रहा है. अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दे रहा है. अमेरिका का विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन समुद्र के रास्ते ईरान के करीब पहुंच चुका है जिससे ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं. हालांकि, अरब देश अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. लगातार धमकियों के बावजूद ईरान पर सीधे हमले से क्यों बच रहा अमेरिका? देखें श्वेतपत्र.

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं. अमेरिका का विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन समुद्र के रास्ते ईरान के करीब पहुंच चुका है जिससे ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं. वहीं अरब देश अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. दूसरी ओर, ईरान ने इजरायल के आठ प्रमुख शहरों पर हमले की योजना तैयार की है. इस बढ़ती तनाव की स्थिति से मध्य पूर्व में सुरक्षा खतरे और बढ़ सकते हैं.

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला करते हुए ट्रंप को ईरान में हुई मौतों, नुकसान और बदनामी के लिए जिम्मेदार ठहराया और उन्हें 'अपराधी' बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान में हालिया अशांति अमेरिका की साजिश है और ट्रंप ने खुद इसमें दखल देकर प्रदर्शनकारियों को उकसाया.

व्हाइट हाउस ने गाजा को फिर से बसाने और उस पर शासन के लिए बने 'बोर्ड ऑफ पीस' के सदस्यों की लिस्ट जारी की है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बोर्ड के अध्यक्ष होंगे. जबकि विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर सदस्य होंगे. देखें दुनिया आजतक.

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. अयातुल्ला अली खामेनेई की हुकूमत ने प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए फांसी जैसे खौफनाक कदम उठाने का फैसला किया तो अमेरिका ने सीधे एक्शन की चेतावनी दे डाली. हालांकि बाद में ईरान और ट्रंप के ताजा बयानों ने दुनिया को थोड़ी राहत दी. मगर ईरान संकट अब सिर्फ एक देश का नहीं, बल्कि वैश्विक टकराव का संकेत बनता जा रहा है.








