
खामेनेई को रास नहीं आई रूस की निंदा! अमेरिकी हमले के बाद चिट्ठी भेजकर पुतिन से कहा- कुछ मदद भी करो...
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रूस, तेहरान का पुराना सहयोगी है और वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो मेंबर के रूप में पश्चिम के साथ ईरान की परमाणु वार्ता में अहम भूमिका निभाता रहा है. साथ ही उसने पहले परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर भी किए थे, जिसे ट्रंप ने 2018 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान छोड़ दिया था.
इजरायल से जंग के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार को मास्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की है. इस मुलाकात के दौरान अराघची राष्ट्रपति पुतिन के लिए ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की एक चिट्ठी भी लेकर पहुंचे हैं. खामेनेई ने अपने विदेश मंत्री को मास्को इसीलिए भेजा ताकि वह राष्ट्रपति पुतिन से और मदद मांग सकें. ईरानी विदेशी मंत्री का यह दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है, जब 1979 की क्रांति के बाद ईरान पर अमेरिका ने सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई कर दी है.
रूस ने दिया मध्यस्थता का ऑफर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल ने सार्वजनिक रूप से सुप्रीम लीडर खामेनेई की हत्या और सत्ता परिवर्तन के बारे में अटकलें लगाई हैं, रूस को डर है कि यह कदम मिडिल ईस्ट को गर्त में ले जा सकता है. पुतिन ने इजरायली हमलों की निंदा की है, लेकिन उन्होंने अभी तक ईरानी परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमलों पर कोई बयान नहीं दिया है. हालांकि पिछले सप्ताह उन्होंने शांति की अपील की थी और परमाणु कार्यक्रम पर मध्यस्थ के तौर पर मास्को की सेवाएं देने की पेशकश की थी.
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एक वरिष्ठ सूत्र ने रॉयटर्स को बताया कि ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची, पुतिन को खामेनेई का एक लेटर सौंपने वाले हैं, जिसमें पुतिन से समर्थन मांगा गया है. ईरान को अब तक रूस का समर्थन पसंद नहीं आया है और वह चाहता है कि पुतिन इजरायल और अमेरिका के खिलाफ़ खुलकर उसका समर्थन करने के लिए और कुछ ज़्यादा काम करें. सूत्रों ने यह नहीं बताया कि तेहरान आखिर रूस से किस तरह की मदद चाहता है.
रूसी वैज्ञानिकों पर न करें हमला

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