
क्रिमिनल नेता बिल लाकर मोदी सरकार क्या हासिल कर लेगी?
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केंद्र सरकार ऐसे नये कानून ला रही है, जिनके तहत प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री अगर गंभीर आपराधिक आरोपों में 30 दिन से ज्यादा हिरासत में रहते हैं तो पद से हटा दिए जाएंगे - सवाल है कि क्या ये प्रयास राजनीति में भ्रष्टाचार और अपराध रोकने के लिए है या महज राजनीतिक है? जिसका उद्देश्य अपने राजनीतिक विरोधियों को ठिकाने लगाना है.
केंद्र सरकार ने अपने नये विधेयक में 30 दिन तक किसी गंभीर आरोप में जेल में रहे प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्री को पद से हटाने की व्यवस्था दी गई है. इस बिल ने अचानक जन लोकपाल आंदोलन की याद दिला दी है. भ्रष्टाचार के खिलाफ जन लोकपाल आंदोलन अन्ना हजारे के नेतृत्व में हुआ था. ये बात अलग है कि आंदोलन के आर्किटेक्ट रहे अरविंद केजरीवाल ने बाद में खुद ही दूरी बना ली - और ये भी देखने को मिला कि दिल्ली के मुख्यमंत्री रहते अरविंद केजरीवाल को भ्रष्टाचार के आरोप में ही तिहाड़ जेल भी जाना पड़ा.
जो कानून लाए जाने की कोशिश हो रही है उसके दायरे में प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री तक आएंगे. जन लोकपाल बिल में भी बिल्कुल ऐसे ही प्रधानमंत्री तक को कानून के दायरे में लाने का प्रस्ताव था. कालांतर में लोकपाल का गठन तो हो गया, लेकिन वे चीजें नहीं शामिल की गईं.
नए कानून के तहत गंभीर आपराधिक आरोपों में अगर आरोपी को महीना भर हिरासत या जेल में रहना पड़ा तो पदच्युत होना पड़ेगा. कानून बन जाने पर जेल या हिरासत के 31वें दिन आरोपी अपने आप पद के अयोग्य हो जाएगा.
सबसे बड़ा सवाल ये है कि ऐसे कानून को लाने की जरूरत क्यों पड़ रही है?
क्या प्रावधान हैं नये कानून में
रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीनों विधेयकों को संसद की संयुक्त समिति को भेजने के लिए लोकसभा में प्रस्ताव भी पेश दिया है. ये प्रस्तावित विधेयक हैं - केंद्र शासित प्रदेश (संशोधन) विधेयक 2025, संविधान (130वां संशोधन) विधेयक 2025 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025.

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