
क्यों जरूरी है असम जैसे सख्त नियम? वो 5 विवादित मामले, जब अस्पतालों ने बिल के लिए डेडबॉडी रोक ली
AajTak
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य में इस नियम को लागू करने का ऐलान करते हुए कहा कि अब कोई भी निजी अस्पताल किसी मरीज का शव रोक नहीं सकेगा. मौत की पुष्टि होने के दो घंटे के भीतर शव परिजनों को सौंपना अनिवार्य होगा, चाहे इलाज का भुगतान बाकी क्यों न हो.
असम सरकार ने निजी अस्पतालों द्वारा शवों को रोके जाने को लेकर बड़ा फैसला लिया है. असम की हिमंता बिस्वा सरकार ने ऐलान किया है कि इलाज का बिल बकाया होने पर भी निजी अस्पताल मृतक के शव को दो घंटे से अधिक समय तक नहीं रोक सकते. मौत की पुष्टि के दो घंटे के भीतर शव को परिजनों को सौंपना अनिवार्य होगा.
ऐसे में हम आपको यहां देश के उन पांच मामलों के बारे में बता रहे हैं, जहां निजी अस्पतालों का अमानवीय चेहरा सामने आया. इन अस्पतालों ने बकाया बिल का भुगतान नहीं होने पर डेडबॉडी परिजनों को नहीं सौंपी.
पहला मामला उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में फरवरी 2024 का है. यहां के एक निजी अस्पताल ने बकाया बिल नहीं चुकाने की वजह से मृतक के शव को उसके परिजनों को नहीं सौंपा. परिजनों ने डॉक्टरों से शव सौंपे जाने की कई मिन्नतें की लेकिन अस्पताल ने शव नहीं सौंपा. इसके बाद मृतक के बेटे को चंदा इकट्ठा करना पड़ा. अस्पताल ने आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद पीड़ित परिवार से पैसे वसूलने की कोशिश की. यह मामला संज्ञान में आने पर सीएमओ की ओर से जांच के लिए एक टीम का गठन किया.
दूसरा मामला दिल्ली के द्वारका का है. इस साल द्वारका के एक अस्पताल ने एक बुजुर्ग महिला की मौत के बाद उसके शव को कई दिनों तक रोके रखा. मृतक महिला के परिवार ने अस्पताल पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया और बकाया बिल नहीं चुकाए जाने पर शव को रोके जाने का विरोध किया.
ऐसा ही एक मामला 2021 में गुजरात के एक निजी अस्पताल का है. कोरोना के दौरान एक अस्पताल ने बिल नहीं चुकाने पर मृतक मरीज का शव परिवार को सौंपने से इनकार कर दिया. इतना ही नहीं, अस्पताल ने परिवार की कार तक जब्त कर ली. इस घटना ने देशभर में निजी अस्पतालों की संवेदनहीनता को उजागर किया.

हरियाणा के दादरी जिले में एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें बीजेपी विधायक को चमचों से दूर रहने की कड़वी नसीहत एक बुजुर्ग ने दी है. यह घटना स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. वीडियो में बुजुर्ग की बातों का अंदाज़ साफ दिखता है जो नेताओं के व्यवहार पर सवाल उठाता है. यह घटना लोकतंत्र के अंतर्गत नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के बीच सीधे संवाद की महत्ता को दर्शाती है. ऐसे संवाद समाज में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व बढ़ाने में मदद करते हैं.

दिल्ली के शास्त्री पार्क इलाके से एक दुखद और गंभीर खबर आई है जहां एक 11 साल के बच्चे की हत्या हुई है. बच्चे की आंख और सिर पर गंभीर चोट के निशान पाए गए हैं. जानकारी के अनुसार, पिता ने ही अपने पुत्र की हत्या की है और उसने घटना के बाद एक वीडियो बनाकर अपने परिवार को भेजा. इस घटना के बाद आरोपी फरार है और इस मामले की जांच जारी है.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के PRO ने दावा करते हुए कहा कि प्रयागराज प्रशासन के बड़े अधिकारी ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से सम्मान पूर्वक दोबारा स्नान कराने की कोशिश की है. जिसके बाद स्वामी अवमुक्तेश्वरानंद की तरफ से प्रशासन के लिखित में माफी मांगने, मारपीट करने वालो पर कार्रवाई और चारों शंकराचार्य के स्नान की मांग की गई.










