
क्या है Tour of Duty का कॉन्सेप्ट जिसके तहत 3 साल के लिए सेना में होगी भर्ती, 2020 में पहली बार आया था आइडिया
AajTak
Tour of Duty Explainer: सेना में भर्ती होने की ख्वाहिश रखने वाले युवाओं के लिए बहुत जल्द सरकार एक नई योजना का ऐलान कर सकती है. इस योजना के तहत 3 से 5 साल के लिए युवा सेना में शामिल हो सकेंगे.
Tour of Duty Explainer: सेना में जवानों की संख्या बढ़ाने और अपना खर्च कम करने के लिए सरकार एक ऐसी योजना पर काम कर रही है, जिसके तहत युवा 3 से 5 साल के लिए अपनी सेवा दे सकते हैं. इसे 'अग्निपथ एंट्री स्कीम' का नाम दिया जाएगा. इस योजना के तहत युवा 3 से 5 साल के लिए सेना में शामिल होंगे और अपनी सेवा देंगे.
एक तय अवधि के लिए सेना में शामिल होने के कॉन्सेप्ट को 'टूर ऑफ ड्यूटी' कहा जाता है. टूर ऑफ ड्यूटी का कॉन्सेप्ट नया नहीं है. दूसरे विश्व युद्ध के समय जब ब्रिटिश वायुसेना के पायलट तनाव में आ गए थे, तब वायुसेना में टूर ऑफ ड्यूटी का कॉन्सेप्ट लाया गया था. इसके तहत शामिल होने वाले पायलट को 2 साल तक 200 घंटों तक विमान उड़ाने को कहा गया था.
टूर ऑफ ड्यूटी का कॉन्सेप्ट कॉर्पोरेट घरानों में भी अपनाया जाता है. अमेरिका के कई कॉर्पोरेट ऑफिस में ऐसा कल्चर चलता है. टूर ऑफ ड्यूटी के तहत लोगों को एक तय अवधि के लिए नौकरी पर रखा जाता है. इसमें रिटायर हो चुके लोगों को भी शामिल किया जाता है.
ये भी पढ़ें-- भारतीय वायुसेना की बढ़ेगी ताकत, GP बम की पहली खेप मिली, जानिए खासियत
भारत में कैसा होगा टूर ऑफ ड्यूटी का प्लान?
- टूर ऑफ ड्यूटी का प्लान कैसा होगा, इस बारे में अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि इसके तहत 3 से 5 साल तक के लिए युवाओं को भर्ती किया जाएगा.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.

दावोस में भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करने और एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है. इस संदर्भ में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से खास बातचीत की गई जिसमें उन्होंने बताया कि AI को लेकर भारत की क्या योजना और दृष्टिकोण है. भारत ने तकनीकी विकास तथा नवाचार में तेजी लाई है ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रह सके. देखिए.

महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद ठाणे जिले के मुंब्रा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. एमआईएम के टिकट पर साढ़े पांच हजार से अधिक वोट के अंतर से जीत हासिल करने वाली सहर शेख एक बयान की वजह से चर्चा में हैं. जैसे ही उनका बयान विवादास्पद हुआ, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान धार्मिक राजनीति से जुड़ा नहीं था. सहर शेख ने यह भी कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और वे उस तरह की राजनीति का समर्थन नहीं करतीं.








