
'क्या हमारे लिए भी ऐसा होगा...', सुप्रीम कोर्ट से तीस्ता सीतलवाड़ को राहत मिलने पर JNU कुलपति का सवाल
AajTak
जेएनयू की कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी सुप्रीम कोर्ट से तीस्ता सीतलवाड़ को राहत मिलने का जिक्र कर रही थीं. सुप्रीम कोर्ट ने 1 जुलाई को 2002 के गोधरा दंगों के मामलों में निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए कथित तौर पर सबूत गढ़ने के केस में सीतलवाड़ को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दी थी.
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को राहत देने पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या सुप्रीम कोर्ट हमारे साथ भी ऐसा बर्ताव करेगा.
दरअसल, जेएनयू की कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी सुप्रीम कोर्ट से तीस्ता सीतलवाड़ को राहत मिलने का जिक्र कर रही थीं. सुप्रीम कोर्ट ने 1 जुलाई को 2002 के गोधरा दंगों के मामलों में निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए कथित तौर पर सबूत गढ़ने के केस में सीतलवाड़ को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दी थी. समाचार एजेंसी के मुताबिक, पिछले साल फरवरी में जेएनयू कुलपति नियुक्त हुईं शांतिश्री धूलिपुड़ी पुणे में मराठी पुस्तक 'जगाला पोखरणारी डावी वालवी' के विमोचन पर पहुंची थीं. उन्होंने कहा, ''वामपंथी परिवेश अब भी है. आप जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने तीस्ता सीतलवाड़ को जमानत देने के लिए शनिवार रात को सुनवाई की. क्या हमारे लिए भी ऐसा होगा.''
मैं बचपन में बाल सेविका थी- शांतिश्री धूलिपुड़ी शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित महाराष्ट्र में सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान विभाग में प्रोफेसर रही हैं. उन्होंने कहा, राजनीतिक शक्ति बनाए रखने के लिए, आपको नैरेटिव पावर की जरूरत है. हमें इसे हासिल करने की जरूरत है. जब तक हम इसे हासिल नहीं कर लेते, हम एक दिशाहीन जहाज की तरह रहेंगे.
शांतिश्री धूलिपुड़ी ने RSS से जुड़े संगठनों के साथ अपने बचपन के जुड़ाव को याद किया. उन्होंने कहा, ''मैं बचपन में 'बाल सेविका' थी. मुझे मेरे संस्कार आरएसएस से ही मिले हैं. मुझे यह कहने में गर्व है कि मैं संघ (आरएसएस) से हूं और मुझे यह कहने में गर्व है कि मैं हिंदू हूं. मैं ऐसा कहने में बिल्कुल नहीं झिझकती. उन्होंने कहा, गर्व से कहती हूं कि मैं हिंदू हूं. इस दौरान कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने जय श्री राम के नारे लगाए.
शांतिश्री ने कहा, वामपंथ और आरएसएस व्यक्तिगत विचारधाराएं हैं. 2014 के बाद इन दोनों विचारधाराओं के बीच संघर्ष में एक बड़ा बदलाव आया है. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने यूनिवर्सिटी परिसर में राष्ट्रीय ध्वज और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगाने के उनके फैसले का विरोध किया था. लेकिन उन्होंने विरोध करने वालों से कहा कि वे टैक्सपेयर के पैसों से यूनिवर्सिटी परिसर में फ्री खाने का आनंद ले रहे हैं और उन्हें राष्ट्रीय ध्वज और पीएम मोदी की तस्वीर के सामने झुकना चाहिए. उन्होंने कहा, 'वह देश के प्रधानमंत्री हैं. वह किसी पार्टी के नहीं हैं. एक साल से अधिक समय बीत चुका है और किसी ने भी इसका विरोध नहीं किया है.

आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









