
क्या सेक्स चेंज करवाकर महिला बन चुके ट्रांस भी गुजारा भत्ता मांग सकते हैं, जानिए क्या कहता है कानून
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ट्रांसजेंडर लोग लगातार अपने हक के लिए आवाज उठा रहे हैं. इसी कड़ी में सुप्रीम कोर्ट के पास एक सवाल आया कि क्या सेक्स चेंज करवाकर पुरुष से महिला बने ट्रांस को भी घरेलू हिंसा कानून के तहत राहत मिल सकती है. अब तक ये अधिकार केवल महिलाओं के पास रहा, लेकिन अब कोर्ट इसपर भी कोई फैसला ले सकती है.
अब शादी और संतान गोद लेने के कानूनी अधिकार की मांग को लेकर ट्रांसजेंडर काफी समय से चर्चा में रहे. अब इसकी लिस्ट थोड़ी और लंबी हो सकती है. शादी या प्रेम संबंध में रहती ट्रांस महिला अगर किसी वजह से प्रताड़ित हो तो वो घरेलू हिंसा कानून का सहारा भी ले सकती है. फिलहाल ये पक्का नहीं हुआ, लेकिन अदालत इसपर जल्द ही कोई एक्शन ले सकती है.
मामले की शुरुआत बॉम्बे हाई कोर्ट में आए एक केस से हुई. मामला एक पुरुष और ट्रांस महिला के संबंधों का था. इसमें प्रताड़ित महिला ने कोर्ट की मदद ली, और कोर्ट ने भी उसका साथ देते हुए कहा कि सेक्स चेंज करवाकर महिला बन चुका पुरुष भी प्रताड़ित होने पर घरेलू हिंसा कानून का सहारा ले सकता है.
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि महिला शब्द अब महिलाओं तक ही सीमित नहीं. इसमें ट्रांसजेंडर भी शामिल हैं, जिन्होंने अपनी पहचान के मुताबिक सेक्स चेंज करवा लिया हो. मामला पहले लोअर कोर्ट में भी जा चुका था. वहां भी जज ने ट्रांस महिला के पक्ष में फैसला सुनाते हुए पति से उसे गुजारा भत्ता देने को कहा था.
16 मार्च को आए इस फैसले के खिलाफ पति सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. अब जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस राजेश बिंदल की पीठ इसपर विचार करेगी. अगर फैसला ट्रांस महिला के पक्ष में जाए, तो बाकी महिलाओं की तरह उसे भी घरेलू हिंसा में राहत मिल सकती है.
कौन है पीड़िता डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट 2005 के सेक्शन 2(a) के मुताबिक, कोई भी महिला जो किसी पुरुष के साथ घरेलू संबंधों में है और इस दौरान किसी भी तरह की प्रताड़ना झेलती है, वो पीड़िता मानी जाएगी.

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