
क्या 'विपक्ष तोड़ो यात्रा' में तब्दील हो रही कांग्रेस की 'भारत जोड़ो यात्रा'?
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कांग्रेस को लोकसभा चुनाव से पहले सियासी संजीवनी देने के लिए राहुल गांधी कन्याकुमारी से कश्मीर तक की भारत जोड़ो यात्रा पर निकले हैं. राहुल की यात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे विपक्षी एकता की राह में दरार आती दिख रही है.
लोकसभा चुनाव 2024 से पहले कांग्रेस के सियासी आधार को दोबारा से मजबूत करने के लिए राहुल गांधी कन्याकुमारी से कश्मीर तक की यात्रा पर निकले हैं. राहुल गांधी की 'भारत जोड़ो यात्रा' जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे विपक्षी एकता के दावे तार-तार हो रहे हैं. कांग्रेस ने टीएमसी, सीपीएम और आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि कांग्रेस को कमजोर करने की कीमत पर विपक्षी एकता नहीं हो सकती. ऐसे में सवाल उठता है कि कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा कहीं विपक्ष तोड़ो यात्रा में तब्दली न हो जाए.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश साफ तौर पर कह चुके हैं कि भारत जोड़ो यात्रा विपक्षी एकता के लिए यात्रा नहीं है. भारत जोड़ो यात्रा कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने के लिए एक यात्रा है. एक मजबूत कांग्रेस के बिना, विपक्षी एकता की कल्पना नहीं की जा सकती है. उन्होंने कहा कि जो भी राजनीतिक दल कांग्रेस के साथ गठबंधन करना चाहते है, उसे यह नहीं सोचना चाहिए कि कांग्रेस से सब कुछ ले लूं और कांग्रेस को कुछ नहीं दूं. अब तक हर कोई कांग्रेस को कमजोर करने की कोशिश करता रहा है.
जयराम रमेश ने कहा कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी के उभार के लिए जहां ममता बनर्जी की टीएमसी जिम्मेदार है, वहां केरल में सीपीएम और बीजेपी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं.
सीपीएम ने साधा था कांग्रेस पर निशाना
जयराम रमेश का यह बयान सीपीएम की उस टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें लेफ्ट पार्टी ने कहा था कि राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा के तहत केरल में ज्यादा दिन बिता रहे हैं, जबकि उन्हें यूपी में ज्यादा दिन बिताना चाहिए. सीपीएम ने ट्वीट कर कहा था, 'भारत जोड़ो है या सीट जोड़ो? केरल में 18 दिन और यूपी में 2 दिन. बीजेपी-आरएसएस से लड़ने का यह निराला तरीका.
केरल में कांग्रेस और लेफ्ट एक दूसरे के खिलाफ हैं. राहुल गांधी केरल से सांसद हैं और भारत जोड़ो यात्रा के तहत इन दिनों वो केरल में पदयात्रा कर रहे हैं, जिसे लेकर सीपीएम चिंतित दिख रही है. यही वजह है कि कांग्रेस और लेफ्ट के बीच जुबानी जंग तेज हो गई हैं.

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