
क्या रूस के खौफ से डगमगा रही स्विट्जरलैंड की 500 साल पुरानी तटस्थता, मजबूत कर रहा सेनाएं?
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हाल में स्विट्जरलैंड ने अपने वोटर्स के सामने बड़ा प्रस्ताव रखा. इसके तहत पुरुषों की तरह ही महिलाओं के लिए भी सैन्य सेवा की अनिवार्यता की बात थी, हालांकि इसे खारिज कर दिया गया. इस बीच ये बात भी उठ रही है कि पांच सौ सालों से न्यूट्रल रहते आया ये देश अचानक अपनी सेनाएं क्यों बढ़ा रहा है.
स्विट्जरलैंड को उसकी हसीन वादियों के अलावा मिलिट्री न्यूट्रैलिटी के लिए भी जाना जाता रहा. ये देश किसी के फटे में पैर अड़ाने से बचता रहा, फिर चाहे वो अमेरिका हो, या जर्मनी. लेकिन सेल्फ डिफेंस के लिए इसके पास अपनी सेना हमेशा रही. हाल में इसमें महिलाओं के लिए भी अनिवार्य ट्रेनिंग की बात उठी जो खारिज हो चुकी. लेकिन सैन्य तौर पर तटस्थ देश भला क्यों सेना मजबूत करने पर जोर दे रहा है?
आक्रामकता कैसे बदली तटस्थता में
सैन्य तटस्थता को स्विट्जरलैंड की राष्ट्रीय पहचान भी कह सकते हैं लेकिन हमेशा से ऐसा नहीं था. 15वीं और 16वीं सदी में स्विस सैनिक पूरे यूरोप में सबसे खतरनाक और मजबूत माने जाते थे. वे सत्ता और पैसों के लिए किसी भी भिड़ जाते. लेकिन साल 1515 में ऐसी घटना हुई, जिसने इस देश को हमेशा के लिए बदल दिया. बैटल ऑफ मेरिगनैनो में फ्रांस से लड़ते हुए उसके दस हजार से ज्यादा सैनिक खत्म हो गए. इस हार के बाद स्विट्जरलैंड काफी कमजोर हो चुका था.
हार के बाद स्विस नेताओं ने फैसला किया कि अब उन्हें यूरोप के राजाओं की लड़ाइयों से बाहर रहना चाहिए. धीरे-धीरे यह सोच स्विस पहचान का हिस्सा बन गई. साल 1648 में ट्रीटी ऑफ पेरिस के दौरान उसने इस बात का आधिकारिक ऐलान कर दिया. वहां मौजूद तमाम देशों ने भी स्विस न्यूट्रैलिटी को माना और सैन्य मदद मांगनी बंद कर दी. युद्ध और खूनखराबे के बीच भी ये देश शांत रहने लगा और बाकियों के लिए कुशन का काम करने लगा.
क्या है न्यूट्रल होने का मतलब - स्विट्जरलैंड किसी भी युद्ध या सैन्य संघर्ष में किसी पक्ष का समर्थन नहीं करता. - वे NATO जैसे किसी सैन्य गठबंधन में शामिल नहीं, ताकि किसी युद्ध में उन्हें बाध्य न किया जा सके. - अगर दो देशों में युद्ध चल रहा हो, स्विटजरलैंड किसी भी सेना को अपने इलाके से होकर जाने नहीं देता. - युद्धरत देशों को स्विस जमीन या हवाई क्षेत्र के जरिए हथियार भेजना मना है. - अपनी तटस्थता के कारण यह देश शांति वार्ताओं, और समझौतों की मेजबानी करता है. - वे युद्ध में पक्ष नहीं लेते, लेकिन मानवीय मदद, और शरणार्थी सहायता में आगे रहते हैं.

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