
क्या नवाज शरीफ बनने जा रहे पाकिस्तान के राष्ट्रपति? जरदारी को हटाने की खबरों पर आई पार्टी की सफाई
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पाकिस्तान में कुछ समय से ऐसी खबरें आ रही हैं कि राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को पद से हटाया जा सकता है. खबरें ऐसी भी हैं कि जरदारी की जगह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाई, पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ राष्ट्रपति बनाए जा सकते हैं. इन खबरों पर एक पार्टी नेता ने प्रतिक्रिया दी है.
पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता कोई नई बात नहीं है जहां सत्ता पर एकमात्र पकड़ सेना की रही है. पाकिस्तान में इस वक्त गठबंधन की सरकार है जहां पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के साथ मिलकर सरकार चला रही है. लेकिन हाल के दिनों में गठबंधन सरकार में अनबन की खबरें आ रही हैं और कहा जाने लगा कि राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी (पीपीपी) को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया जा रहा है. ऐसी खबरें भी आ हैं कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पीएलएम-एन के मुखिया नवाज शरीफ राष्ट्रपति बनाए जाएंगे. इन खबरों पर पार्टी के सीनेटर इरफान-उल-हक सिद्दीकी ने टिप्पणी की है.
सिद्दीकी ने कहा है कि नवाज शरीफ का सक्रिय राजनीति में वापस आने और राष्ट्रपति बनने की खबरें मात्र अफवाह हैं. उन्होंने कहा कि नवाज शरीफ राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ने नहीं जा रहे हैं.
बुधवार रात डॉन न्यूज के कार्यक्रम 'दूसरा रुख' में बोलते हुए सिद्दीकी ने खबरों को खारिज करते हुए कहा, 'नवाज शरीफ ने न तो राष्ट्रपति बनने की इच्छा जताई है और न ही इस बारे में कोई चर्चा हुई है. इस अटकल में कोई सच्चाई नहीं है कि नवाज शरीफ खुद राष्ट्रपति बनने के लिए व्यवस्था बदलने की कोशिश कर रहे हैं. ये बेबुनियाद, मनगढ़ंत कहानियां हैं.'
क्या जरदारी ने शहबाज शरीफ सरकार के लिए दिक्कत पैदा की?
सिद्दीकी ने पहले भी जरदारी के इस्तीफे की खबरों का खंडन किया था. जियो न्यूज के कार्यक्रम 'जियो पाकिस्तान' में बोलते हुए उन्होंने कहा था, 'जरदारी के इस्तीफा देने, इमरान के बेटों के आने, नवाज शरीफ के अदियाला जाने की खबरें... ये खबरें नहीं हैं. ये फर्जी, झूठी बातें हैं. जरदारी ने सरकार के लिए कोई मुश्किल पैदा नहीं की है और वो राष्ट्र प्रमुख के रूप में अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को समझते हैं.'
पीएमएल-एन नेता ने कहा था कि शहबाज शरीफ सरकार को राष्ट्रपति के साथ काम करने में कोई परेशानी नहीं है और उन्हें पद से हटाने का कोई ठोस कारण नहीं है. उन्होंने सवाल करते हुए कहा था, 'हमारा पीपीपी के साथ गठबंधन है. हम इस व्यवस्था को क्यों गिराएंगे?'

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