
क्या थरूर के बाद कांग्रेस अब सलमान ख़ुर्शीद को भी बीजेपी का सुपर प्रवक्ता बोलेगी?
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कांग्रेस के लिए दुविधा यह है कि पार्टी सलमान खुर्शीद पर कार्रवाई करे या मौन हो जाए. जाहिर है कि कार्रवाई होने से आंतरिक असंतोष बढ़ेगा. यदि कार्रवाई नहीं की जाती, तो बीजेपी इसे कांग्रेस की कमजोरी और दिशाहीनता के रूप में प्रचारित करेगी.
ऑपरेशन सिंदूर में भारत को हुई हानि-लाभ का का आंकड़ा विपक्ष चाहे जितना भी पूछ ले, पर बीजेपी सरकार ने कांग्रेस पर जो गुगली फेंकी है उससे पार्टी समझ नहीं पा रही है कि कैसे निपटे? विदेशों में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में हिस्सा बने कांग्रेस नेता एक के बाद एक मोदी सरकार की तारीफ में कसीदे पढ़ रहे हैं. सबसे पहले इसकी शुरुआत कांग्रेस नेता शशि थरूर ने की थी. थरूर के के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने भी ऐसी बात की है जो कांग्रेस को पचेगी नहीं. खुर्शीद ने इंडोनेशिया में एक मीटिंग के दौरान जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के केंद्र सरकार के फैसले की तारीफ की है. जाहिर है कि खुर्शीद के इस बयान को भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस पर हमला करने के लिए इस्तेमाल करेगी. बीजेपी ने इसे कांग्रेस के आंतरिक अंतर्विरोध और नेतृत्व की कमजोरी के रूप में पेश किया. जबकि कांग्रेस नेताओं ने खुर्शीद के बयान को पार्टी लाइन से हटकर बताया. जाहिर है कि आज नहीं तो कल कोई कांग्रेस नेता जरूर सलमान खुर्शीद को भी शशि थरूर की तरह बीजेपी का सुपर प्रवक्ता कह सकता है. बीजेपी नेता अमित मालवीय ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए एक्स पर लिखा है, क्या अब सलमान खुर्शीद को भी कांग्रेस नेता बीजेपी का सुपर प्रवक्ता बताएंगे?
हालांकि, खुर्शीद ने अपने बयान को राष्ट्रीय हित में कही गई बात बताई है, न कि बीजेपी के समर्थन में. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर वह भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, न कि किसी पार्टी का. यह रुख उन्हें पार्टी के भीतर कुछ हद तक बचाव प्रदान करता है. हालांकि, राशिद अल्वी जैसे नेताओं ने कार्रवाई की मांग की है, जिससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी का एक धड़ा उनके खिलाफ सख्त कदम उठाने के पक्ष में है.
सलमान खुर्शीद और शशि थरूर के बयान
हाल ही में, सलमान खुर्शीद ने इंडोनेशिया में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के तौर पर कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाने से जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद की धारणा खत्म हुई और वहां समृद्धि आई है. उन्होंने अपनी बात को वजनदार बनाने के लिए जम्मू कश्मीर में 2019 के बाद हुए चुनावों में 65% मतदान और एक निर्वाचित सरकार के गठन को सकारात्मक बदलाव के रूप में उल्लेख किया. यह बयान कांग्रेस के पारंपरिक रुख से अलग था. खुर्शीद ने 2019 में कहा था कि अनुच्छेद 370 ने जम्मू-कश्मीर को भारत के साथ जोड़ने का रास्ता दिखाया था, और इसे हटाना एक गलत फैसला है.
इसी तरह, शशि थरूर भी हाल के दिनों में पार्टी लाइन से हटकर बयान देने के लिए चर्चा में रहे हैं. थरूर ने भी ऑपरेशन सिंदूर और अनुच्छेद 370 के संदर्भ में केंद्र सरकार की कुछ नीतियों की तारीफ की थी, जिसके बाद कांग्रेस ने उनको बीजेपी का सुपर प्रवक्ता कहकर तंज कसा. बीजेपी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला और आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने खुर्शीद और थरूर के बयानों को कांग्रेस के नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी, के लिए चुनौती के रूप में पेश किया है.
कांग्रेस की आंतरिक राजनीति और अंतर्विरोध

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