
क्या खामेनेई रिजीम के कोलैप्स के बाद टूट सकता है ईरान? 50% आबादी पर्शियन, बाकी बलोच-कुर्द-अरब
AajTak
ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच ऐसे भी दावे किए जा रहे हैं कि अगर खामेनेई रिजीम कोलैप्स होता है तो इसका असर देश के विभाजन के रूप में सामने आ सकता है. किस बिना पर ये संभावना जताई जा रही है, जानने के लिए पढ़ें ये रिपोर्ट.
ईरान और इजरायल संघर्ष जारी है. इस बीच इजरायल ने ईरान के सभी बड़े सैन्य अधिकारियों और हस्तियों को चुन-चुन कर निशाना बनाया. अब इजरायल खामेनेई के खात्मे की बात कर रहा है. वहीं ईरान के इस्लामिक रिब्लिक के विरोधी खेमों से भी ऐसे दावे हो रहे हैं कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो जल्द खामेनेई रिजीम खत्म हो सकता है.
इन सब चर्चा और दावों के मद्देनजर कई सवाल उठने लगे हैं. अगर खामेनेई रिजीम कोलैप्स होता है तो ईरान का क्या होगा? क्या फिर से रजा पहलवी के समर्थकों के हाथ सत्ता आ जाएगी या फिर कोई दूसरा समूह दावेदार होगा? कुछ ऐसे भी दावे किए जा रहे हैं कि खामेनेई के बाद ईरान टूट भी सकता है. पिछले दिनों ईरान के एक निर्वासित नेता ईमान फोरोउतान ने आशंका जताई है कि सत्ता परिवर्तन के बाद ईरान विभाजित हो सकता है और उत्तर-पश्चिमी ईरान में रहने वाले कुर्द ऐसा करने के लिए इन हालातों का फायदा उठा सकते हैं.
ईरान की बड़ी आबादी हैं शिया मुस्लिम आखिर ऐसे कयास क्यों लगाए जा रहे हैं, इसे जानने के लिए ईरान के इथिनिक स्ट्रक्चर पर नजर डालना जरूरी है. खासकर यहां की आबादी और अलग-अलग क्षेत्रों में रहने वाले विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक समुदायों की क्या स्थितियां है. एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार ईरान की अनुमानित जनसंख्या 87.6 मिलियन (वर्ष 2023 के मध्य तक) होगी. ईरानी सरकार के अनुमान के अनुसार यहां की जनसंख्या में मुस्लिम आबादी 99.4 प्रतिशत हैं, जिनमें से 90 से 95 प्रतिशत शिया हैं और 5 से 10 प्रतिशत सुन्नी हैं.
सिर्फ 5 से 10 प्रतिशत सुन्नी आबादी ईरान में अधिकांश सुन्नी तुर्कमेन, अरब, बलूच और कुर्द हैं. इनमें तुर्कमेन ईरान के उत्तर पूर्व, अरब दक्षिण-पश्चिम, बलूच दक्षिण-पूर्व और कुर्द उत्तर-पश्चिम प्रांतों में रहते हैं. वहीं अफगान शरणार्थी और अन्य प्रवासी भी सुन्नी आबादी का एक बड़ा हिस्सा हैं. वैसे अफगान शरणार्थी आबादी सुन्नी और शिया दोनों में विभाजित हैं.
ईरान की आबादी का 61 प्रतिशत हैं पर्शियन ईरान को सिर्फ शिया और सुन्नी में विभाजित कर नहीं देखा जा सकता है. यहां बसने वाले वाले इथनिक ग्रुप्स की स्थिति को जाने बिना ईरान को समझना मुश्किल है. ईरान की आबादी धर्म के अलावा अलग-अलग सांस्कृतिक और भाषाई समूहों में बंटा हुआ है. ईरान की जनसंख्या में सबसे बड़े जिस समुदाय का दबदबा है, वो हैं पर्शियन या फारसी . यहां इनकी जनसंख्या लगभग 61 प्रतिशत है. पर्शियन आबादी ज्यादातर देश के मध्य, दक्षिणी और पूर्वी क्षेत्रों में फैली हुई है. जातीय रूप से वे इंडो-आर्यन हैं और फारसी भाषा बोलते हैं.
आनुवंशिक रूप से फारसियों के करीब ताजिक हैं, जो एक समान भाषा बोलते हैं और इंडो-यूरोपियन के वंशज हैं. वास्तव में, फारस की खाड़ी के तट से लेकर फरगाना घाटी तक की भूमि कमोबेश एकरूप तौर से इस समूह का घर है.

ईरान अपने सुरक्षा प्रमुख की मौत के शोक में डूबा हुआ है और इंतकाम की कसमें खा रहा है. उधर इजरायल और अमेरिका इस उम्मीद में हैं कि उसने ईरान के तमाम बड़े नेता, कमांडर और प्रमुख मार दिए हैं, तो अब ईरान सरेंडर करेगा. लेकिन ईरान सरेंडर के मोड में नहीं है. इस बीच दुनिया हैरान है कि जब इजरायल और अमेरिका इतने हमले कर रहा है तो ईरान के सुरक्षा प्रमुख खुद को सुरक्षित क्यों नहीं रख पाए. इजरायल ने कैसे अली लारीजानी को मारा.

जैसे जैसे अमेरिका, इजरायल और ईरान का युद्ध आगे बढ़ रहा है वैसे वैसे तबाही की तस्वीरें सामने आ रही हैं, एक तरफ अमेरिका और इजरायल ईरान को निशाना बना रहे हैं उनके शहरों में धमाके कर रहे हैं. दूसरी ओर ईरान भी पलटवार कर रहा है. लेकिन आज सुबह इजरायली हमले के बाद बेरूत का रिहायशी इलाका कब्रगाह में बदल गया और चीख पुकार मचने लगी, इजरायल ने बेरूत में 22 मंजिला इमारत को निशाना बनाया गया.

दिल्ली-एनसीआर में पश्चिमी विक्षोभ के असर से मौसम अचानक बदल गया है. ठंडी हवाएं, बादल और हल्की बारिश से तापमान में गिरावट आई है और लोगों को गर्मी से राहत मिली है. मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक हल्की बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का अनुमान जताया है. गुरुवार और शुक्रवार के लिए येलो अलर्ट जारी है. तापमान 27 से 31 डिग्री के बीच रह सकता है और 21 मार्च के बाद मौसम धीरे-धीरे साफ होगा.

16 मार्च को वाराणसी में गंगा में नाव पर इफ्तार पार्टी मनाना कुछ मुस्लिम युवकों को महंगा पड़ गया. बीजेपी और हिंदूवादी संगठन का आरोप है कि, इन लोगों ने रोजा इफ्तार पार्टी करने के बाद गंगा नदी में बिरयानी और हड्डियां फेंक दीं. जैसे ही स्थानीय बीजेपी नेता की ओर से इन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई, पुलिस हरकत में आई और आनन फानन में 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. अब संत समाज और बीजेपी इसे हिंदुओं के खिलाफ सोची समझी साजिश करार दे रहे हैं तो विपक्ष पूछ रहा है कि, गंगा में इफ्तार पार्टी करने से कौन सा कानून तोड़ा गया जो पुलिस ने इन लोगों को गिरफ्तार कर लिया. सवाल है कि, ये कौन लोग हैं जिन्हें यूपी की अमन शांति रास नहीं आ रही.

जेडीयू नेता केसी त्यागी ने पार्टी की सदस्यता का नवीनीकरण न कराकर अपने राजनीतिक रुख को स्पष्ट कर दिया है. उनके इस कदम को बिहार की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है. साथ ही, पार्टी के भीतर नई पीढ़ी के उभार और पुराने नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं.








