
क्या इंदिरा गांधी की तरह कानूनी कार्रवाई को राजनीतिक हथियार बना पाएंगे राहुल और प्रियंका?
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नेशनल हेराल्ड केस में 8 साल बाद गांधी परिवार कानून और कचहरी के फंदे में नजर आ रहा है. विपक्ष में रहने पर कई बार ऐसे हालात पैदा हुए कि गांधी नेहरू परिवार के लिए कठिन परिस्थितियां आईं. ऐसे वक्त में उन्होंने कुशल राजनीति का परिचय देते हुए ऐसी कार्रवाई और अदालतों के मामलों का इस्तेमाल इस तरह से किया कि उनकी राजनीतिक रूप से वापसी हुई.
नेशनल हेराल्ड केस की जांच अब कांग्रेस नेता राहुल गांधी से पूछताछ तक पहुंच गई है. ईडी की इस कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस ने देश के अलग-अलग हिस्सों में 'सत्याग्रह' किया. अगर हम अतीत को देखें, तो पता चलेगा कि कांग्रेस को ऐसे और अभियानों की जरूरत है.
अभी नेशनल हेराल्ड केस में नेहरू गांधी परिवार के किसी सदस्य की गिरफ्तारी की संभावना नहीं है. हालांकि, प्रवर्तन निदेशालय की कार्यशैली से परिचित लोगों के मुताबिक, आने वाले समय में ऐसी किसी संभावना से इनकार भी नहीं किया जा सकता.
नेशनल हेराल्ड केस में 8 साल बाद गांधी परिवार कानून और कचहरी के फंदे में नजर आ रहा है. विपक्ष में रहने पर कई बार ऐसे हालात पैदा हुए कि गांधी नेहरू परिवार के लिए कठिन परिस्थितियां आईं. ऐसे वक्त में उन्होंने कुशल राजनीति का परिचय देते हुए कानूनी कार्रवाई और अदालतों के मामलों का इस्तेमाल इस तरह से किया कि उनकी राजनीतिक रूप से वापसी हुई.
जब इंदिरा ने अपनी गिरफ्तारी को बनाया राजनीतिक हथियार
मौजूदा हालात 3 अक्टूबर 1977 की याद दिला रहे हैं. उस वक्त इंदिरा गांधी पर कार्रवाई हुई थी. इसके बाद 1978 के बाद संजय गांधी को 5-6 बार अदालतों का चक्कर लगाना पड़ा. जेल भी जाना पड़ा, लेकिन इंदिरा गांधी ने अपने खिलाफ हुई कार्रवाई का इस्तेमाल माहौल बनाने में किया और जनता को अपने पक्ष में किया.
ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या राहुल गांधी अपनी दादी के कौशल को दोहरा सकते हैं. क्या वे 2024 में करिश्मा दिखाकर नरेंद्र मोदी को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा सकते हैं. लेकिन पार्टी के ज्यादातर नेता निजी तौर पर ये नहीं मानते.

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