
क्या अमेरिका में शटडाउन ट्रंप को और मजबूत बना देगा? पहले कार्यकाल में भी लिए थे विवादित फैसले
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डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी और विपक्षी दल डेमोक्रेट्स के बीच ठनी हुई है, जिसका सीधा असर फंड पर दिख रहा है. सरकारी कामकाज के लिए पैसे रिलीज नहीं हो रहे. अगर ये बुधवार तक खिंच गया तो अमेरिका में सरकारी शटडाउन हो जाएगा. ये स्थिति हालांकि ट्रंप को और मजबूत बना देगी. वे ज्यादा तीखे फैसले ले सकते हैं. ऐसी कोशिश वे पहले कार्यकाल में भी कर चुके.
रिपब्लिकन्स और डेमोक्रेट्स के बीच तनातनी का असर अमेरिकी सरकार के शटडाउन के रूप में दिख सकता है. ये नई बात नहीं. हर कुछ सालों में अमेरिका पर ये डर मंडराता है कि उसकी कुछ एजेंसियां बंद हो जाएंगी, लाखों लोग खाली बैठ जाएंगे और कई योजनाएं रुक जाएंगी. लेकिन इस लड़ाई का फायदा इस बार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मिल सकता है. वे एग्जीक्यूटिव ऑर्डर निकालते हुए कई ऐसे फैसले ले सकते हैं, जो अब तक डेमोक्रेट्स की वजह से नहीं लिए जा सके थे.
यहां कई सवाल हैं.
- पहला कि आखिर ये शटडाउन है क्या, और अगर ये चीज इतनी पुरानी है तो इसका हल क्यों नहीं निकल सका. - शटडाउन से अमेरिका पर क्या असर होगा, क्या वो कमजोर पड़ सकता है. - डोनाल्ड ट्रंप कैसे इसके बहाने ज्यादा मजबूत हो सकते हैं.
जब अमेरिकी सरकार का सालाना बजट पास नहीं होता, तो इसे सरकारी शटडाउन कहते हैं. इसका मतलब है कि सरकार कुछ या सभी कर्मचारियों को वेतन देना बंद कर देगी. यह सिर्फ कर्मचारियों पर ही असर नहीं डालता, बल्कि कई सरकारी एजेंसियां भी खाली हो जाती हैं. कभी-कभी बजट का कुछ हिस्सा पास हो जाता है. ऐसे में कुछ विभाग काम करते हैं, जबकि कुछ लंबी या छोटी छुट्टी पर भेज दिए जाते हैं. अगर बजट पास ही न हो तो कंप्लीट शटडाउन हो जाएगा.
अमेरिका में सरकारी शटडाउन तभी होता है जब कांग्रेस और राष्ट्रपति सालाना बजट पर सहमति नहीं बना पाते. पिछले दशकों में कई बार ऐसा देखा गया. कई बार कंप्लीट शटडाउन भी होता है. साल 2018 में हुआ शटडाउन महीनेभर से ज्यादा खिंचा. इस दौरान लाखों सरकारी कर्मचारी खाली बैठे रहे. एजेंसियां बंद रहीं. यहां तक कि लोगों को जरूरी सरकारी सर्विस नहीं मिल पा रही थी.
यूएस में शटडाउन काफी हद तक राजनीतिक तकरार का नतीजा होता है, इसलिए इसे रोक पाना आसान नहीं. - कई बार कांग्रेस और राष्ट्रपति के बीच विवाद रहता है कि किसे, कितना बजट दिया जाए. - कभी-कभी शटडाउन इसलिए होता है क्योंकि किसी योजना पर सहमति नहीं बन पाती. - सरकार को हर साल नए वित्तीय वर्ष से पहले बजट पास करना होता है. अगर ये नहीं हुआ तो भी शटडाउन होगा. - कानून में शटडाउन रोकने का कोई ऑटोमैटिक हल नहीं. यानी जब तक सहमति नहीं बनेगी, ये चलता रहेगा.

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