
कोरोना संकट 2.0: एनडेमिक से पैनडेमिक की ओर कैसे लौट गया भारत, कब तक राहत की उम्मीद?
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कोरोना महामारी की ये दूसरी लहर दुनियाभर में तबाही मचाती दिख रही है. भारत के अधिकांश हिस्सों में केस कई गुना बढ़ गए हैं. अस्पतालों में आईसीयू बेड्स और वेंटिलेटर की कमी होती जा रही है. आखिर किन कारणों से ये तबाही लौटी और इससे बचने के लिए आम लोग क्या कर सकते हैं? जानिए, सभी सवालों के जवाब.
इस साल 2 फरवरी को जब देश में कोरोना के केस 8,635 दर्ज किए गए तो लोगों को उम्मीद जगने लगी थी कि महामारी खत्म होने को है. यहां तक कि सरकारें पैनडेमिक की बजाय एनडेमिक का नारा देने लगी थीं. संकट खत्म मानकर सबकुछ खोल दिया गया, लोग घरों से निकल पड़े, सोशल डिस्टेंसिंग केवल प्रतीकात्मक दिखने लगी, मास्क मुंह और नाक से नीचे खिसककर गले तक आ गए. शादी समारोहों, पार्टियों में भीड़ दिखने लगीं, चुनावी रैलियों में भीड़ बढ़ने लगी, स्कूल-दफ्तर खोल दिए गए. सिनेमा हॉल, मॉल्स, पर्यटन स्थल गुलजार होने लगे. और फिर अचानक मार्च खत्म होते-होते देशभर में और दुनियाभर में कोरोना की दूसरी लहर का शोर लौट आया. अप्रैल की शुरुआत से ही महामारी का दौर ऐसा लौटा कि पिछली लहर को काफी पीछे छोड़ गया. देश में 2 फरवरी के मिनिमम केस के ठीक 70 दिन बाद कोरोना वायरस संक्रमण सारे रिकॉर्ड तोड़ चुका है. भारत में कोरोना की रफ्तार इतनी तेज़ है कि 12 अप्रैल को देश में कुल 1.69 लाख मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि 900 से अधिक लोगों की मौत हुई है. अकेले दिल्ली में ही 10 हजार से अधिक केस जबकि महाराष्ट्र में 55 हजार के पार नए मरीज रोज सामने आ रहे हैं. 30 जनवरी 2020 को देश में कोरोना का पहला केस सामने आया था. 15 महीने में इस महामारी से 1 करोड़ 34 लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं जबकि 1 लाख 70 हजार लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है. देश में अभी 11 लाख से भी अधिक एक्टिव मरीज हैं.
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