
कोरोना: पूर्वोत्तर और केरल में थम नहीं रहा कहर, लेटेस्ट R-फैक्टर से मिल रहे खतरे के संकेत
AajTak
कोरोना की दूसरी लहर (Covid Second Wave) के कम होते प्रभाव के बीच एक बार फिर कुछ राज्यों में एक्टिव केस तेज़ी से बढ़े हैं. केरल और पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में नए मामले आने के कारण R-फैक्टर (R-Factor) का असर भी बढ़ा है, जो चिंता का विषय है.
कोरोना (Corona) की दूसरी लहर अभी पूरी तरह थमी नहीं है और अब कई राज्यों में फिर से बढ़ रहे मामले चिंता भी बढ़ा रहे हैं. कोरोना के बढ़ते मामलों में सबसे अहम चीज़ R-फैक्टर है, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में वायरस के फैलने की रफ्तार की जानकारी देता है. आंकड़ों के मुताबिक, ये R-फैक्टर एक बार फिर तेज़ी से बढ़ रहा है. केरल (Kerala) और पूर्वोत्तर (North East) के राज्यों में एक्टिव केस (Active Cases) की संख्या बढ़ने से इसकी रफ्तार भी बढ़ी है. जून के आखिर में R-फैक्टर 0.88 की रफ्तार से बढ़ा है, जबकि मई के आखिर में ये 0.78 तक पहुंच गया था.
आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









