
कोरोनाः दूसरी लहर के चार महीने, पहली के एक साल पर भारी, जानें कैसे मची तबाही
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देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर अब कमजोर पड़ने लगी है. चार महीने पहले 17 फरवरी से संक्रमण के मामले बढ़ने शुरू हुए थे. पहली लहर के एक साल पर दूसरी लहर के चार महीने कितने भारी पड़े, आइए समझते हैं...
देश में कोरोना की दूसरी लहर कमजोर पड़ने लगी है. लेकिन दूसरी लहर ने भारत में जितनी तबाही मचाई, उतनी तबाही शायद कहीं और नहीं देखी गई. ऑक्सीजन के लिए सड़कों पर तड़पते लोग, अस्पताल में बेड के इंतजार में बैठे मरीज, दवाओं के लिए दर-दर भटकते मरीजों के परिजन. ये ऐसी तस्वीरें दूसरी लहर ने दिखाईं जिसकी कल्पना शायद किसी ने भी की नहीं होगी. कोरोना की जब पहली लहर आई थी, तब हम सबके लिए ये नई चुनौती थी, लेकिन इतनी बुरी तस्वीरें उस वक्त भी सामने नहीं आईं, जैसी तस्वीरें दूसरी लहर में देखने को मिलीं. अब क्योंकि दूसरी लहर थोड़ी कमजोर पड़ने लगी है. ऐसे में ये जानना भी जरूरी है कि कोरोना की दूसरी लहर, पहली लहर से कितनी ज्यादा खतरनाक थी. लेकिन इसे समझने के लिए पहले ये पता लगाना जरूरी है कि दूसरी लहर की शुरुआत कब से हुई?
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