
कोटकपूरा फायरिंग केस: सुखबीर के खिलाफ चार्जशीट पर SAD नाराज, बोली- सारे दावे झूठे
AajTak
पंजाब के कोटकपूरा गोलीकांड के मामले में पंजाब पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने बीते रोज कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी है. जिसमें पूर्व डिप्टी सीएम और तत्कालीन गृह मंत्री सुखबीर बादल और पूर्व DGP सुमेध सिंह सैनी को मास्टरमाइंड बताया गया है. इस मामले में शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब की भगवंत मान सरकार पर हमला बोला है.
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने शनिवार को अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ 2015 के कोटकपूरा पुलिस फायरिंग मामले में दायर चार्जशीट को उत्पीड़न करार दिया है. पार्टी ने कहा है कि वो कानूनी रूप से और लोगों की अदालत में जाकर आरोप पत्र को चुनौती देगी. SAD का कहना है कि ये चार्जशीट मनगढ़ंत है और सभी मोर्चों पर आप सरकार की विफलता से ध्यान हटाने का प्रयास है.
शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेताओं ने इस मामले में प्रेस कॉन्फ्रेंस की और मुख्यमंत्री भगवंत मान को इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति नहीं करने की चेतावनी दी. शिअद ने कहा कि आप सरकार ने सभी मोर्चों पर अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए खुले तौर पर बदले की भावना से चार्जशीट दायर की है. SAD अदालत की अवमानना का केस दर्ज करने समेत सभी विकल्पों पर राय लेगी. क्योंकि पूर्व आईजी कुंवर विजय प्रताप की रिपोर्ट को अलग करते हुए उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया गया है.
'चार्जशीट में किए गए दावे गलत'
शिअद ने कहा- सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है. वो राज्य से बाहर थे और किसी भी तरह से उन्हें मास्टरमाइंड नहीं कहा जा सकता. चार्जशीट में गलत दावा किया गया है. पार्टी ने यह भी कहा कि एसआईटी प्रमुख लालकृष्ण यादव और अन्य अधिकारियों ने विशुद्ध रूप से राजनीतिक निर्देश को पूरा करने के लिए पक्षपातपूर्ण तरीके से काम किया है.
'कोर्ट के आदेश का किया उल्लंघन'
अकाली नेता प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा, महेश इंदर सिंह ग्रेवाल और डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि सरकार ने पहले ही अपनी मंशा पर पानी फेर दिया. विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने एक सार्वजनिक घोषणा की कि एलके यादव के नेतृत्व वाली एसआईटी 28 फरवरी से पहले चालान दाखिल करेगी. कैबिनेट मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने भी बेहबल कलां में प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि सुखबीर सिंह बादल का नाम शामिल किया जाएगा. एसआईटी ने चालान दाखिल किया. आप नेताओं ने ये घोषणाएं इस तथ्य के बावजूद कीं कि उच्च न्यायालय ने एसआईटी को सीलबंद लिफाफे में अदालत में अपना चालान पेश करने का निर्देश दिया था. उसके बावजूद कैसे एक सीलबंद रिपोर्ट आप नेतृत्व को उपलब्ध कराई गई और मीडिया में लीक भी हो गई?

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आमने सामने हैं. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सीधे सीधे योगी आदित्यनाथ को चुनौती दे रहे हैं तो प्रशासन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से पूछ रहा है कि बताएं वो शंकराचार्य कैसे हैं. लेकिन बात अब इससे भी आगे बढ़ गई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विरोधी उन्हें स्वयंभू शंकराचार्य बता रेह हैं.

227 सदस्यीय BMC में बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत होती है. महायुति ने 118 वार्ड जीतकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. इसके बावजूद मेयर पद को लेकर सहमति नहीं बन पाई है. स्थिति तब और नाटकीय हो गई, जब शिंदे ने कथित खरीद-फरोख्त की आशंका के चलते नवनिर्वाचित 29 शिवसेना पार्षदों को सप्ताहांत में एक फाइव-स्टार होटल में ठहरा दिया.

नोएडा केवल उत्तर प्रदेश का शो विंडो नहीं है, बल्कि प्रति व्यक्ति आय, प्रति व्यक्ति कंज्यूमर शॉपिंग, प्रति व्यक्ति इनकम टैक्स, प्रति व्यक्ति जीएसटी वसूली आदि में यह शहर देश के चुनिंदा टॉप शहरों में से एक है. पर एक शहरी की जिंदगी की सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है. बल्कि जब उसकी जान जा रही हो तो सड़क के किनारे मूकदर्शक बना देखता रहता है.

उत्तर प्रदेश की सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच चल रहे विवाद में नई उर्जा आई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुली चुनौती के साथ योगी आदित्यनाथ को उनके शंकराचार्य होने पर सवाल उठाए हैं. इस मुद्दे ने राजनीति में तेजी से हलचल मचा दी है जहां विपक्ष शंकराचार्य के समर्थन में खड़ा है जबकि भाजपा चुप्पी साधे हुए है. दूसरी ओर, शंकराचार्य के विरोधी भी सक्रिय हुए हैं और वे दावा कर रहे हैं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ही सच्चे स्वयंभू शंकराचार्य हैं.

उत्तर प्रदेश की सियासत में उल्टी गंगा बहने लगी है. मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर हुआ विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है. जहां खुद अविमुक्तेश्वरानंद के तेवर सरकार पर तल्ख हैं, तो वहीं बीजेपी पर शंकराचार्य के अपमान को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर जाकर स्नान करने से उन्हें रोका था.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.







