
'कोई भी मुल्क क्षेत्रीय विस्तार के लिए धमकी या बल का इस्तेमाल ना करे', G20 के मंच से उठी आवाज
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जोहान्सबर्ग में G20 समिट के शुरुआत में ही पास हुए डिक्लेरेशन में सीमा बदलने के लिए ताकत के उपयोग का विरोध, आतंकवाद की निंदा, मानवाधिकार सम्मान, मल्टीलेटरलिज़्म, क्लाइमेट फाइनेंस, फ़ूड सिक्योरिटी और विकासशील देशों की सहायता पर जोर दिया गया. भारत ने छह प्रमुख वैश्विक पहलों का प्रस्ताव रखा.
जोहान्सबर्ग में शनिवार को 20वें सालाना समिट के बाद G20 के सदस्य देशों ने एक जॉइंट डिक्लेरेशन जारी किया, जिसमें कहा गया कि किसी भी देश को इंटरनेशनल लेवल पर मान्यता प्राप्त बॉर्डर को बदलने के लिए ताकत या धमकी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. यह सॉवरेनिटी और टेरिटोरियल इंटीग्रिटी के लिए ग्लोबल कमिटमेंट की साफ पुष्टि है.
US के एतराज़ के बावजूद पूरी सहमति से फाइनल किए गए इस डॉक्यूमेंट में आतंकवाद की 'हर तरह से' निंदा की गई और नस्ल, लिंग, भाषा या धर्म की परवाह किए बिना ह्यूमन राइट्स और फंडामेंटल फ्रीडम के लिए ज़्यादा सम्मान की अपील की गई.
अजीब बात है कि इस डिक्लेरेशन को लीडर्स समिट के खत्म होने के बजाय, उसकी शुरुआत में ही मंज़ूरी दे दी गई. यह ग्रुप की बढ़ती जियोपॉलिटिकल दरारों, हथियारों से लैस लड़ाइयों और आर्थिक बिखराव को लेकर चिंता को दिखाता है.
'ताकत का इस्तेमाल करने से...'
खास देशों का नाम लिए बिना, टेक्स्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि UN चार्टर के मुताबिक, "सभी देशों को किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता या राजनीतिक आज़ादी के खिलाफ़ इलाके पर कब्ज़ा करने की धमकी देने या ताकत का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए."
डिप्लोमैट्स ने इसे रूस, इज़रायल और म्यांमार के लिए एक छिपा हुआ सिग्नल समझा. डिक्लेरेशन में कहा गया है कि ग्लोबल अस्थिरता, बढ़ता जियो-इकोनॉमिक कॉम्पिटिशन और बढ़ती असमानता इनक्लूसिव ग्रोथ के लिए खतरा हैं.

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