
कॉन्ट्रैक्ट गया, टीम से बाहर हुए… फिर भी नहीं टूटा हौसला! ईशान किशन की वापसी पर कोच ने खोले राज
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टीम इंडिया दो साल बाद एक बार फिर T20 वर्ल्ड कप का खिताब बचाने के लिए तैयार है. इस मिशन के लिए घोषित भारतीय स्क्वॉड में शुभमन गिल का बाहर होना और ईशान किशन की वापसी सबसे बड़ा सरप्राइज़ साबित हुआ. दिसंबर 2023 में ड्रॉप होने के बाद ईशान ने शिकायत की बजाय डोमेस्टिक क्रिकेट में दमदार प्रदर्शन के जरिए खुद को फिर साबित किया. अब पॉडकास्ट ‘बल्लाबोल’ में उनके बचपन के कोच उत्तम मजूमदार ने ईशान के कमबैक के पीछे छिपे कई राज खोले हैं. कोच का दावा है कि इस वर्ल्ड कप में फैन्स को ‘ईशान किशन 2.0’ देखने को मिलेगा.
दो साल पहले टीम इंडिया ने दूसरी दफा T20 वर्ल्ड कप का ख़िताब अपने नाम किया था. घड़ी की सूइयां घूम-घूमकर हमें उस मोड़ पर ला चुकी हैं, जब बारी इस टाइटल को डिफेंड करने की है. ये ज़िम्मेदारी रखी गई है कप्तान सूर्यकुमार यादव के कंधों पर. टूर्नामेंट बिलकुल हमारे सिरहाने खड़ा है और कहना होगा कि टीम इंडिया की तैयारियां भी चाक-चौबंद हैं. वर्ल्ड कप के लिए स्क्वॉड की घोषणा पहले ही हो चुकी है. इसमें शुभमन गिल का ड्रॉप होना और ईशान किशन की वापसी सबसे अप्रत्याशित रही.
ईशान किशन करीबन दो साल पहले (दिसंबर 2023 में) टीम से ड्रॉप हुए. बीसीसीआई के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से हाथ गंवा दिया था. लेकिन 2025 का दिसंबर उनके लिए ख़ुशखबरी लेकर आया और उनका चयन सीधे वर्ल्ड कप टीम में हुआ. निश्चित तौर पर डोमेस्टिक क्रिकेट में उनका सामयिक प्रदर्शन इसका आधार बना. लंबे समय तक टीम से दूर रहते हुए ईशान किशन ने बिना शिकायत किए अपने खेल और फिटनेस पर काम किया. इसका सकारात्मक परिणाम सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी जैसे बड़े टूर्नामेंट में देखने को मिला.
SMAT 2025 फाइनल में शतक लगाकर झारखंड को उन्होंने पहली बार ये टाइटल दिलवाया. इससे पहले रणजी और फिर विजय हजारे ट्रॉफी में भी उन्होंने अपने फॉर्म को बरक़रार रखते हुए ये साबित किया कि वो टीम इंडिया के लिए भरोसेमंद विकल्प हैं. बल्लेबाज़ी में निरंतरता से वो लगातार चयनकर्ताओं का ध्यान खींच रहे थे. पर इतने सघन कॉम्पीटीशन में ये कमबैक उनके लिए कतई आसान नहीं था.
ईशान किशन के बचपन के कोच उत्तम मजूमदार ने पॉडकास्ट 'बल्लाबोल' में बताया कि दो सालों में ईशान किशन ने कैसे 'रीस्टार्ट' किया. वे इस दौरान बुची बाबू टूर्नामेंट से लेकर डीवाई पाटिल लीग, काउंटी लीग, रणजी ट्रॉफी, सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी, ईरानी कप, दलीप ट्रॉफी में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहे. इस दौरान उनका झुकाव ध्यान और अध्यात्म की तरफ भी रहा. गीता के श्लोकों ने उन्हें कर्म करते रहने के लिए प्रेरित किया और वो अब अलग ईशान किशन नजर आ रहे हैं.
ईशान किशन के करियर को देखा जाए तो ये केवल प्रतिभा की कहानी नहीं है, बल्कि सही समय पर मिले सही मार्गदर्शन की मिसाल भी है. ईशान की इस यात्रा में उनके शुरुआती कोच उत्तम मजूमदार की भूमिका बेहद अहम रही. कोच मजूमदार बताते हैं कि क्रिकेटर के पिता प्रणव पांडे पहली बार जब अपने बेटे को उनसे मिलवाने आये तो उसी दिन ये एहसास हो गया था कि ईशान लंबी रेस के घोड़े हैं.

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