
कैसे आधे दशक में 45 गुना बढ़ गया बंगाल सरकार का दुर्गा पूजा फंड? अब देना होगा इसका जवाब
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पंडालों की चमक और रंगीनी सिर्फ पूजा का हिस्सा नहीं रही. पिछले छह सालों में बंगाल सरकार ने पूजा समितियों को फंड के रूप में मदद के पंख दे दिए, बजट से कई गुना ज्यादा खर्च किया और हर समिति को करोड़ों का फायदा पहुंचाया. चुनावी साल में बढ़ती रकम ने इसे सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति भी बना दिया है. इस साल भी पूजा ग्रांट में 30% की बढ़ोतरी के साथ ट्रेंड जारी रहने की उम्मीद है.
पश्चिम बंगाल के सबसे बड़े त्योहार दुर्गापूजा को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जुलाई के आखिर में एक बड़ा ऐलान किया था. उन्होंने कहा था कि रजिस्टर्ड पूजा कमेटियों को दी जाने वाली वित्तीय मदद में 30% की बढ़ोतरी की जाएगी. पूरे राज्य में ऐसी करीब 45,000 कमेटियां हैं. इस वजह से राज्य सरकार पर करीब 500 करोड़ रुपये का खर्च आने वाला है, जो पिछले साल के 380 करोड़ रुपये से कहीं ज्यादा है.
बता दें कि ये कोई इसी बार लिया गया पहला फैसला नहीं है. राज्य के बजट दस्तावेज बताते हैं कि पिछले छह सालों में दुर्गा पूजा पर सरकारी खर्च कई गुना बढ़ा है. साल 2019-20 से लेकर 2025-26 तक पूजा आयोजकों को दिए जाने वाले बजटेड ग्रांट्स लगभग 45 गुना बढ़ गए हैं. इसमें दिलचस्प बात ये है कि असल खर्च अक्सर बजट अनुमान से कहीं ज्यादा रहा है.
बजट बनाम असल खर्च
उदाहरण के लिए वित्त वर्ष 2020 (FY20) में सरकार ने पूजा ग्रांट के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था लेकिन असल खर्च 61 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. ये बजट से छह गुना ज्यादा रहा.
आगे ये ट्रेंड लगातार चलता रहा. FY21 में राज्य ने 40 करोड़ रुपये तय किए लेकिन ये खर्च करीब 197 करोड़ हुआ यानी ये लगभग पांच गुना ज्यादा था.
FY25 तक आते-आते बजट 320 करोड़ रुपये तक पहुंच गया लेकिन संशोधित आंकड़ों में असल खर्च 385 करोड़ रुपये रहा यानी लगभग 20 प्रतिशत ज्यादा.

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