कुकी-मैतई की लड़ाई में नागा भी कूदे? मणिपुर में 2 हफ्ते बाद तीन लोगों की हत्या ने बढ़ाई चिंता
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तांगखुल नागा बहुल उखरुल जिला के लिटन पुलिस थाना क्षेत्र में पड़ने वाले कुकी गांव थोवई में सुबह-सुबह भारी गोलीबारी की आवाजें सुनी गईं. पुलिस के मुताबिक तीन क्षत-विक्षत शव मिले, जिन पर स्पष्ट रूप से धारदार चाकूओं से वार के निशान थे. बीएसएफ और पुलसि ने इलाके की घेराबंदी कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है.
मणिपुर में करीब दो हफ्ते की शांति के बाद एक बार फिर शुक्रवार सुबह हिंसा भड़क गई, जिसमें तीन कुकी लोगों की मौत हो गई. घटना उखरुल जिले के थोवई गांव की है. यहां सुबह भारी गोलीबारी के बाद तीन युवकों के क्षत-विक्षत शव पाए गए. इसके बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या कुकी-मैतई समुदायों के बीच चल रही लड़ाई में नागा भी कूद पड़े हैं? कारण, उखरुल जिला तांगखुल नागा बहुल है और यहां ये हिंसा की पहली घटना है. बताया जा रहा है कि मृत युवकों पर उस समय हमला हुआ जब वह अपने गांव थोवई की रखवाली कर रहे थे. ये कुकी समुदाय का गांव है.
लिटन पुलिस थाना क्षेत्र में पड़ने वाले कुकी गांव थोवई में सुबह-सुबह भारी गोलीबारी की आवाजें सुनी गईं. पुलिस के मुताबिक तीन क्षत-विक्षत शव मिले, जिन पर स्पष्ट रूप से धारदार चाकूओं से वार के निशान थे. बीएसएफ और पुलसि ने इलाके की घेराबंदी कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है. तीन मृत युवकों की उम्र 24 साल से 35 साल है.
दरअसल, अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मैतेई समुदाय की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' आयोजित किए जाने के बाद 3 मई को पूर्वोत्तर राज्य में जातीय झड़पें हुईं. इसके बाद मैतेई और कुकी समुदाय के बीच जातीय संघर्ष में 150 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं सैकड़ों घायल हैं. हजारों लोग बेघर हो चुके हैं और राहत शिविर में रहने को मजबूर हैं.
इस बीच अब नागा बहुल जिले में युवकों की मौत से स्थिति बिगड़ने की आशंका है. घटना के बाद पुलिस प्रशासन की टेंशन बढ़ गई है. इसको लेकर पुलिस प्रशासन अलर्ट हो गया है और चप्पे-चप्पे पर फोर्स तैनात कर दी गई है. अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल आरोपियों की तलाश में कॉम्बिंग की जा रही है और स्थिति काबू में है.
1990 में नागाओं और कुकियों के बीच हुई थी हिंसक झड़प
बता दें कि नागा और कुकी समुदाय के बीच भी कुकी संघर्ष का इतिहास रहा है. आखिरी बार 1990 के दशक में नागाओं और कुकियों के बीच हिंसक झड़पें देखी गईं, जिनमें सैकड़ों लोग मारे गए. उस समय जमीन को लेकर दोनों समुदाय के बीच संघर्ष हुआ था. दरअसल, मणिपुर की पहाड़ियों में कुकी अपनी "मातृभूमि" होने का दावा करते हैं. इसका बड़ा हिस्सा ग्रेटर नागालैंड या नागालिम के साथ ओवरलैप हो गया था, जिसे नागा अपनी मातृभूमि मानते हैं. इसी को लेकर 90 के दशक में दोनों समुदायों के बीच खूनी संघर्ष देखने को मिला था.

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