
किस पर लागू, कितनी फीस, भारतीयों पर क्या असर... ट्रंप के 'वीजा बम' के नए नियम पर हर सवाल का यहां जवाब
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डोनाल्ड ट्रंप के $100K H-1B वीजा फीस को लेकर मची अफरा-तफरी के बाद व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी Karoline Leavitt ने इससे जुड़े तमाम असमंजस पर तस्वीर साफ की है और बताया है कि किसपर और कब-कब नई फीस लगेगी.
डोनाल्ड ट्रंप के H-1B वीजा पर तगड़ा चार्ज लगाने के ऐलान ने दुनिया में खलबली मचा दी. खासतौर पर IT सेक्टर के लिए अमेरिका का 1 लाख डॉलर एच-1बी वीजा फीस का नया नियम एक बड़ा झटका नजर आया और इससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया. भारत के लिए तो ये एक बड़ी मुसीबत इसलिए भी बनती दिखी, क्योंकि अमेरिका में भारतीय तकनीकी पेशेवर, एच-1बी वीजा धारकों का 75% के आस-पास हिस्सा हैं. नई फीस लगाने के ऐलान के बाद मचे हड़कंप के बीच व्हाइट हाउस की ओर से बड़ा बयान जारी किया गया और प्रेस सेक्रेटरी कैरोलाइन लेविट ने साफ किया कि ये 1,00,000 डॉलर (करीब 88 लाख रुपये) की फीस कोई एनुअल चार्ज नहीं है, बल्कि नए आवेदकों के लिए वन टाइम फीस है.
क्या है H-1B वीजा और इसका नया नियम? पहले समझ लेते हैं कि आखिर ये H-1B Visa है क्या और डोनाल्ड ट्रंप ने क्या नया नियम लागू किया है. तो एच-1बी एक अमेरिका का नॉन रेजिडेंशियल वीजा है, जो वहां मौजूद कंपनियों को टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, फाइनेंस और एजुकेशन जैसे खास सेक्टर्स में विदेशी कर्मचारियों को हायर करके नौकरी देते की परमिशन देता है. Infosys, TCS, Google, अमेजन से लेकर माइक्रोसॉफ्ट और मेटा जैसी कंपनियों में ज्यादातर डेवलपर, इंजीनियर समेत अन्य कर्मचारी एच-1बी वीजा लेकर काम करते हैं और इनमें भारतीयों की संख्या अधिक है.
नए नियम में अमेरिकी कंपनियों को किसी विदेशी कर्मचारी की एंट्री या दोबारा एंट्री के लिए हर एच-1बी एप्लीकेशन पर 1 लाख डॉलर (करीब 88.10 लाख रुपये) का चार्ज लगाने का ऐलान किया गया. इस नए नियम के बारे में अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने कहा था कि इसका भुगतान प्रतिवर्ष किया जाएगा और यह नए वीजा के साथ-साथ रिन्यूअल पर भी लागू होगा. रिपोर्ट्स में साफ कहा गया था कि कर्मचारियों को तब तक अमेरिका में वापस आने की अनुमति नहीं दी जा सकती जब तक कि उनकी कंपनी शुल्क का भुगतान नहीं कर देती.
एयरपोर्ट्स पर अफरा-तफरी का माहौल इस ऐलान के बाद से ही भारत समेत दुनियाभर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और एयरपोर्ट्स पर अमेरिका वापस लौटने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी. सैन फ्रांसिस्को क्रॉनिकल की मानें, तो कुछ वीजा धारकों ने इस डर से विमान से उतरकर अपनी यात्रा कैंसिल कर दी, कि उन्हें अमेरिका में दोबारा प्रवेश से रोका जा सकता है.
तमाम रिपोर्ट्स में ये दावा भी किया गया कि इन हालातों के बीच भारत में मौजूद अमेरिकी पेशेवर जो वापस लौटने के लिए एयरपोर्ट्स पर पहुंचे, उन्होंने US की सीधी उड़ान की लागत में भारी उछाल का सामना किया. इसमें कहा गया कि ट्रंप की घोषणा के महज दो घंटे में ही नई दिल्ली से न्यूयॉर्क जाने वाली फ्लाइट का टिकट करीब 37,000 रुपये से बढ़कर 70,000-80,000 रुपये तक का हो गया.

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