
कर्नाटक: ईदगाह में गणेश उत्सव की मंजूरी नहीं, मालिकाना हक को लेकर HC में सुनवाई शुरू
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कर्नाटक ईदगाह मामले में हाई कोर्ट फिर सुनवाई करने जा रहा है. मालिकाना हक को लेकर दोनों पार्टियों की दलीलों को सुना जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में यथास्थिति कायम रखने के आदेश दिए हैं. उस आदेश के बाद ही मामला फिर कर्नाटक हाई कोर्ट में पहुंच गया है जहां पर मालिकाना हक लेकर लड़ाई लड़ी जाएगी.
कर्नाटक में ईदगाह मैदान में गणेश उत्सव की परमीशन को लेकर बड़ा विवाद चल रहा है. कर्नाटक हाई कोर्ट से मंजूरी मिलने के बाद मामला ठंडा पड़ सकता था, लेकिन वक्फ बोर्ड ने तुरंत ही सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और वहां से यथास्थिति बरकरार रखने के आदेश दे दिए गए. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कर दिया कि अभी के लिए ईदगाह में गणेश उत्सव नहीं हो सकता है. वहीं अगर मालिकाना हक को लेकर लड़ाई है तो दलीलें कर्नाटक हाई कोर्ट में रखी जा सकती हैं. अब हाई कोर्ट में भी मामले की सुनवाई शुरू हो गई है.
मालिकाना हक की लड़ाई शुरू
इस बार मालिकाना हक को लेकर वक्फ बोर्ड और दूसरे पक्ष की तरफ से दलीलें पेश की जा रही हैं. वैसे सुप्रीम कोर्ट में दोनों कपिल सिब्बल और दुष्यंत दवे ने इसी मालिकाना हक को लेकर अपनी दलीलें रखी थीं. सिब्बल ने SC के एक पुराने फैसले को उद्धृत करते हुए कहा कि- HC की सिंगल जज बेंच ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था. लेकिन खंडपीठ ने गणेश पूजा के लिए इजाजत दे दी. यह तो पिछले 200 साल से वक़्फ़ की सम्पत्ति है. यहाँ किसी और धर्म के फंक्शन की इजाज़त नहीं दी जा सकती. सिब्बल ने कहा कि 1831 से यह मैदान हमारी मिल्कियत है. ये वक्फ के कब्जे में है. आज 2022 में अचानक वहाँ धार्मिक आयोजन की इजाजत दे दी गयी. क्योंकि अगले साल चुनाव है. वैसे कपिल सिब्बल के अलावा दुष्यंत दवे ने भी वक्फ बोर्ड की तरफ से कुछ जरूरी दलीलें रखी थीं.
सुप्रीम कोर्ट में क्या दलीलें रखी गईं?
उन्होंने दो टूक कहा कि की प्रॉपर्टी मेरी है. मैं किसी को दूं मेरी मर्जी. कोर्ट किसी को अपने ऑर्डर के जरिए इसके इस्तेमाल की.इजाजत कैसे दे सकता है? ये वक्फ की संपत्ति है. सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के मुताबिक जब मेरे धर्म की धार्मिक गतिविधियां ईदगाह में होती हैं तो दूसरे को कैसे इजाजत दी जा सकती है? क्या मुस्लिम समुदाय को हिंदू ट्रस्ट के स्वामित्व वाले मैदान में प्रवेश करने की अनुमति दी गई है? सरकार अब कह रही है कि प्रॉपटी पर मालिकाना हक को लेकर विवाद है. लेकिन आप 200 साल बाद ये मालिकाना हक़ का दावा नहीं कर सकते. क्या किसी हिंदू धार्मिक परंपराओं के लिए इस्तेमाल हो रही ज़मीन पर मुस्लिम समुदाय को ऐसी इजाज़त दी जा सकती है?
वैसे जानकारी के लिए बता दें कि जस्टिस अशोक किनागी के चैंबर में ये सुनवाई होने वाली है. रात 10 बजे कोर्ट नहीं खोला जाएगा, जज के चेंबर में ही सभी को अपनी दलीलें रखने का मौका मिलेगा.

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