
कभी नहीं निकलता IPO, आपकी भी है शिकायत? जानें अलॉटमेंट प्रक्रिया
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लोगों के मन में सवाल होता है कि आखिरी उन्हें आईपीओ का अलॉटमेंट क्यों नहीं मिलता है. वो जानना चाहते हैं कि किस प्रक्रिया के तहत आईपीओ का अलॉटमेंट होता है, ताकि पता चले कि उन्हें अगर नहीं मिला, तो क्यों नहीं मिला? और जिसे मिला तो उसे किस नियम के तहत मिला.
अक्सर लोगों की शिकायत होती है कि आईपीओ में अप्लाई तो करते हैं, लेकिन कभी निकला नहीं है. लोगों के मन में सवाल होता है कि आखिरी उन्हें आईपीओ का अलॉटमेंट क्यों नहीं मिलता है. वो जानना चाहते हैं कि किस प्रक्रिया के तहत आईपीओ का अलॉटमेंट होता है, ताकि पता चले कि उन्हें अगर नहीं मिला, तो क्यों नहीं मिला? और जिसे मिला तो उसे किस नियम के तहत मिला. दरअसल, निवेशक आईपीओ अलॉटमेंट के नियम को बारीकी से समझना चाहते हैं. क्योंकि अच्छी कंपनी के आईपीओ हमेशा ओवरसब्सक्राइब होता है, यानी आईपीओ में मौजूद शेयर से कई गुने ज्यादा निवेशकों के आवेदन मिल जाते हैं. सेबी के नियम के मुताबिक एक आईपीओ में एक रिटेल निवेशक अधिकतर 2 लाख रुपये तक की बोली लगा सकता है. हालांकि, इसके लिए न्यूनतम बोली होना जरूरी है. इसका अर्थ है कि अगर किसी आईपीओ में एक लॉट 15 शेयरों की है, तो आपको कम से कम 15 शेयरों के लिए बोली लगानी ही होगी.More Related News













