
कटरा वैष्णो देवी में रोपवे प्रोजेक्ट से नाराज व्यापार मंडल का धरना, श्रद्धालुओं को हो सकती है असुविधा
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वैष्णो देवी में करीब एक करोड़ श्रद्धालु हर साल दर्शन के लिए आते हैं जिसे देखते हुए श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने रोपवे लगाने का फैसला किया. वैष्णो देवी यात्रा को बढ़ावा देने के लिए और बुजुर्ग, बच्चों तथा बीमार श्रद्धालुओं को इस 13 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर सुविधा देने के लिए श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड कटरा वैष्णो देवी में रोपवे प्रोजेक्ट लगाने जा रहा है.
कटरा वैष्णो देवी में 250 करोड़ के रोपवे प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने से व्यापार मंडल नाराज है. व्यापारी कई दिनों से इस प्रोजेक्ट के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और मार्च निकाल रहे हैं. अब व्यापार मंडल ने ऐलान किया है कि बुधवार से वे धरने पर बैठेंगे जिसका असर श्रद्धालुओं को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं पर पड़ सकता है.
6-7 मिनट में पूरा हो जाएगा सफर
वैष्णो देवी में करीब एक करोड़ श्रद्धालु हर साल दर्शन के लिए आते हैं जिसे देखते हुए श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने रोपवे लगाने का फैसला किया. वैष्णो देवी यात्रा को बढ़ावा देने के लिए और बुजुर्ग, बच्चों तथा बीमार श्रद्धालुओं को इस 13 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर सुविधा देने के लिए श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड कटरा वैष्णो देवी में रोपवे प्रोजेक्ट लगाने जा रहा है.
यह रोपवे प्रोजेक्ट ताराकोट मार्ग से शुरू किया जा रहा है जिसमें केबल कार ताराकोट मार्ग से लेकर सांझी छत के बीच चलाई जाएंगी. रोपवे प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद श्रद्धालु मात्र 6 से 7 मिनट में ताराकोट मार्ग से सांझी छत पहुंच पाएंगे जिससे आम श्रद्धालुओं के साथ-साथ बुजुर्गों तथा बीमार श्रद्धालुओं को भी माता वैष्णो देवी के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होगा.
क्यों हो रहा रोपवे का विरोध? रोपवे शुरू होने के बाद आस्था के साथ खिलवाड़ होना विरोध की बड़ी वजह बताया जा रहा है. लोगों का कहना है कि जब श्रद्धालुओं को बाणगंगा चरण पादुका और अर्द्धकुमारी में दर्शन करने का मौका नहीं मिलेगा तो वैष्णो देवी आने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा का कोई महत्व नहीं रह जाएगा. इसके साथ-साथ कटरा वैष्णो देवी ट्रैक पर काम करने वाले दुकानदारों, घोड़ा, पिट्ठू और पालकी चलाने वाले लोगों को डर सता रहा है कि कहीं उनका व्यापार छिन न जाए.
सुविधाओं पर पड़ेगा हड़ताल का असर यही वजह है कि उन्होंने एक बार फिर धरने पर बैठने का फैसला कर लिया है. आपको बता दें वैष्णो देवी ट्रैक पर बाणगंगा से वैष्णो देवी की तरफ चढ़ाई में करीब दो हजार दुकानें हैं और पूरे ट्रैक पर करीब 12,200 घोड़े, पिट्ठू, पालकी चालक हैं जो पिछले कई साल से वैष्णो देवी यात्रा को चलाने में योगदान दे रहे हैं.

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