
ऑनलाइन निवेश के नाम पर बुजुर्ग को 33 लाख की चपत, दिल्ली में मल्टी-स्टेट साइबर सिंडिकेट का पर्दाफाश
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दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे मल्टी-स्टेट साइबर सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है, जिसके तार चीन से जुड़े होने का शक है. इस गिरोह ने एक सीनियर सिटिजन को डिजिटल इन्वेस्टमेंट के नाम पर 33 लाख रुपए से ज्यादा की चपत लगाई. जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, फर्जी कंपनियों, शेल अकाउंट और क्रिप्टो ट्रांजेक्शन के राज खुलते जा रहे हैं.
दिल्ली से चल रहे एक हाईटेक साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है. दिल्ली पुलिस ने इस मल्टी-स्टेट साइबर सिंडिकेट का लिंक चीनी जुड़े होने का शक जताया है. इस सिंडिकेट ने एक 61 वर्षीय सीनियर सिटिजन को फर्जी डिजिटल इन्वेस्टमेंट स्कीम के जरिए 33 लाख रुपए से अधिक की ठगी का शिकार बनाया. पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही है. यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस साइबर सिंडिकेट में कितने लोग शामिल हैं.
एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसे ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट के नाम पर झांसे में लिया गया. इसके बाद अलग-अलग खातों के जरिए उससे बड़ी रकम ट्रांसफर करवा ली गई. टेक्निकल एनालिसिस में सामने आया कि ठगी की रकम कई बेनिफिशियरी अकाउंट्स से होकर गुजरी. आखिर में एक फर्जी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के बैंक खातों में पहुंची. जांच के दौरान पुलिस ने इस फर्जी फर्म से जुड़े दो लोगों की पहचान कर ली.
उनकी पहचान उत्तर प्रदेश के फैजाबाद निवासी शिवम सिंह और दिल्ली के रहने वाले लक्ष्य के रूप में की गई. पुलिस ने लक्ष्य को 19 नवंबर को गिरफ्तार किया था. पूछताछ में उसने खुलासा किया कि उसने सह-आरोपी शुभम और अन्य लोगों के कहने पर फर्जी फर्म के नाम पर बैंक अकाउंट खोले. लक्ष्य ने पुलिस को बताया कि उसने बैंक अकाउंट खुलवाए, सिम कार्ड खरीदे और हर बैंक किट के बदले उसे 20 हजार रुपए महीने का भुगतान किया जाता था.
पुलिस को शक है कि इन्हीं खातों के जरिए ठगी की रकम आगे ट्रांसफर की जाती थी. इस तरह मनी लॉन्ड्रिंग की जा रही थी. मुख्य साजिशकर्ता शुभम को पकड़ने के लिए दिल्ली-NCR में कई हफ्तों तक लगातार छापेमारी की गई. शुभम गिरफ्तारी से बचने के लिए बार-बार सिम कार्ड बदल रहा था. आखिरकार शनिवार को उसे तिलक नगर इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस ने उसके पास से एक लैपटॉप, 2 मोबाइल फोन, 5 चेकबुक और 6 डेबिट कार्ड बरामद किए हैं.
पूछताछ में शुभम ने सिंडिकेट के गहरे फाइनेंशियल नेटवर्क का खुलासा किया, जिसमें कई शेल कंपनियां शामिल होने की बात सामने आई है. पुलिस का दावा है कि शुभम ने USDT के जरिए ट्रांजेक्शन कर पैसे को एक चीनी हैंडलर तक पहुंचाया. USDT एक तरह की क्रिप्टोकरेंसी है, जिसे अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1:1 के अनुपात में एक स्थिर वैल्यू पर रखा जाता है. इसी रास्ते से बार-बार मनी लॉन्ड्रिंग की जाती रही. जैसे ही शुभम को लक्ष्य की गिरफ्तारी की भनक लगी, उसने सबूत नष्ट कर दिए.

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