
एक ही साल, तीन बड़ी घटनाएं और आरोपियों की रिहाई... कमजोर पैरवी और सबूतों की कमी से बरी हो गए गुनहगार
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सुप्रीम कोर्ट ने निठारी कांड में सुरेंद्र कोली और मोनिंदर पंढेर को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है. इस केस में कई बुनियादी खामियां रहीं – जैसे फॉरेंसिक साक्ष्य की कमी, पुलिस कस्टडी में दिए इकबालिया बयानों का बिना पुष्टि कोर्ट में पेश किया जाना और अहम सबूतों की गुमशुदगी.
Supreme Court Judgment on Noida Nithari killings: निठारी कांड के दौरान मारे गए 16 में से 15 बच्चों के मर्डर केस में देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य आरोपी यानी डी-5 कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया है. अब सिर्फ एक मामला ऐसा है, जिसमें कोली को उम्रकैद की सजा मिली है. हालांकि कोली ने इस फैसले को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. अब अगर कोली इस मामले में भी बरी हो जाता है, तो फिर सवाल उठता है कि निठारी के 16 बच्चों का कातिल कौन था?
- 2006 मुंबई ट्रेन सीरियल ब्लास्ट - 189 मौत, 800 घायल. सभी 12 आरोपी बरी - 2006 मालेगांव ब्लास्ट - 6 मौत, 100 घायल. सभी 7 आरोपी बरी - 2006 निठारी कांड - 16 बच्चों की मौत. आरोपी मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली बरी
बीते दो हफ्तों में दो बड़े फैसले आए. पहले मुंबई ट्रेन सीरियल ब्लास्ट केस में और दूसरे मालेगांव ब्लास्ट केस में. इन दोनों ही मामलों में दो अलग अलग अदालतों ने केस में आरोपी बनाए गए सभी आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया. यानि मुंबई ट्रेन ब्लास्ट में जो लोग मारे गए या मालेगांव धमाके में जिनकी मौत हुई उनका असली गुनहगार कौन है ये कोई नहीं जानता.
पर इन्हीं दो फैसलों के बीच एक तीसरा फैसला भी आता है. ये फैसला बेहद खामोशी के साथ सामने आया. ये फैसला था 2006 के उस निठारी केस को लेकर जिसमें नोएडा के निठारी की एक कोठी के पीछे से 16 बच्चों के कंकाल मिले थे. देश की सबसे बड़ी अदालत, यानि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही थी. उसी सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद ये फैसला सुनाया कि सुरेंद्र कोली को जिन 12 बच्चों की मौत के सिलसिले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फांसी की सजा से बरी कर दिया था, वो फैसला सही था. इसी बिनाह पर सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने भी सुरेंद्र कोली और पंढेर को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया. यानि कायदे से जैसे मुंबई ट्रेन सीरियल ब्लास्ट या मालेगांव ब्लास्ट का कोई गुनहगार नहीं था ठीक वैसे ही निठारी के 16 बच्चों का भी कोई कातिल नहीं है.
दरअसल, निचली अदालत ने 16 बच्चों की हत्या के मामले में से 13 मामलों में कोली को फांसी की सजा सुनाई थी।.जबकि मोनिंदर सिंह पंढेर को 3 मामलों में. कोली को बाकी तीन मामलों में बरी कर दिया गया था. लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाद में फांसी के 13 में से 12 मामलों में कोली को बरी कर दिया. साथ ही पंढेर को भी. कोली को सिर्फ एक रिंपा हल्दर केस में सजा हुई. वो भी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस केस में मिली फांसी की सजा को उम्र कैद में तब्दील कर दिया. इलाहाबाद हाईकोर्ट के इसी फैसले को सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.
अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कोली और पंढेर को बरी कर दिया. पंढेर पहले से ही जेल से बाहर है. कुल मिलाकर कोली पर निठारी मामले में अब सिर्फ एक ही केस बचा है. रिंपा हल्दर का केस. जिसमें उसे उम्र कैद की सजा मिली है. कोली ने इस सजा को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रखा है. अगर इस केस में भी कोली बरी हो जाता है तो फिर वो जेल से बाहर आ जाएगा.

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