
एक ही फ्रॉक, ज्योमेट्री बॉक्स तक नहीं... टीचर ने सुनाये द्रौपदी मुर्मू से जुड़े स्कूल के किस्से
AajTak
2009 से 2015 के बीच सिर्फ छह साल में द्रौपदी मुर्मू ने अपने पति, दो बेटों, मां और भाई को खोया. उस वक्त उन्होंने ब्रह्मकुमारीज से मेडिटेशन टेक्नीक को सीखा गरीब बच्चों की पढ़ाई को लिए उन्होंने एक स्कूल बनाया और इसके लिए अपने ससुराल की सारी संपत्ति दान कर दी.
आदिवासी समुदाय से आने वाली द्रौपदी मुर्मू कल देश की 15वीं राष्ट्रपति के तौर पर शपथ लेने जा रही हैं. भारत की प्रथम नागरिक बनने तक का उनका सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा है, लेकिन इन सबके बीच अगर कोई एक चीज उन्हें खास बनाती है तो वो है उनकी सरलता, लोगों की निस्वार्थ सेवा और त्याग की भावना, उनके इन गुणों का पता उनके बचपन की कहानियों से ही चलता है. खुद उनकी स्कूल टीचर ने उनके व्यक्तित्व से जुड़ी कई अनोखी बातें बताई हैं.
'बुक बैंक से पढ़ाई, फिर दान की किताबें'
उपेरबेड़ा गांव में उनकी अपर प्राइमरी स्कूल के टीचर वासुदेव बहेरा का कहना है कि भौतिकवादी वस्तुओं का दान कर देना मुर्मू के स्वभाव का हिस्सा है. मुर्मू के बचपन की एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया- द्रौपदी के पिता बिरांच टुडू उपेरबेड़ा गांव के प्रधान हुआ करते थे. उनका परिवार काफी गरीब था. द्रौपदी एक ही फ्रॉक में स्कूल आया करती थी और उसके पास ज्योमेट्री बॉक्स तक नहीं था. तब स्कूल ने उसे ज्योमेट्री बॉक्स दिया था. जो बच्चे किताबें नहीं खरीद सकते थे, उनके लिए स्कूल में बुक बैंक होता था. द्रौपदी ने बुक बैंक किताबें उधार लेकर पढ़ाई-लिखाई की. हालांकि, जब उसने 7वीं की परीक्षा पास कर ली, तब उसने ना सिर्फ बुक बैंक की किताबें वापस कर दी, बल्कि दूसरे बच्चों की मदद के लिए अपनी कुछ किताबें भी दान कर दीं.
'फटे कपड़ों से बनाए डस्टर'
उन्होंने भावी राष्ट्रपति के बारे में एक और बात बताई. उन्होंने कहा कि उस समय स्कूल में ब्लैकबोर्ड को साफ करने के लिए डस्टर नहीं होते थे. तब द्रौपदी मुर्मू ने फटे हुए कपड़ों से डस्टर बनाए और स्कूल के हर क्लासरूम के लिए एक डस्टर बनाया.
द्रौपदी मुर्मू ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत एक काउंसिलर के तौर पर की. उसके बाद वो एक विधायक, मंत्री, राज्यपाल रहीं और अब देश के सर्वोच्च पद यानी कि राष्ट्रपति के पद पर आसीन होने जा रही हैं. उनके करीबी लोगों का कहना है कि उनके स्वभाव की सरलता ही उनकी सफलता की कुंजी है और जब इसमें विनम्रता, आत्मविश्वास और त्याग की भावना भी जुड़ जाती है तो सही मायनों में वो द्रौपदी मुर्मू ही होती हैं.

आज पूरी दुनिया में यही चर्चा है कि ईरान-अमेरिका युद्ध- रुकेगा या फिर महायुद्ध में बदल जाएगा. इस सवाल की वजह है युद्ध को लेकर अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप का दावा. ट्रंप ने ईरान के पावर प्लांट पर हमले की नई डेडलाइन का एलान किया, वो भी ये कहते हुए कि ईरान की तरफ से युद्धविराम की पेशकश की गई है और दोनों देशों के बीच टेबल पर बातचीत जारी हैं. लेकिन ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति के दावों को झूठ का पुलिंदा बताया. अब सवाल यही है कि पर्दे के पीछे क्या ईरान और अमेरिका में कोई बातचीत चल रही है, क्या जल्द युद्धविराम की संभावना है, या फिर ट्रंप के दावे में कोई दम नहीं.

ईरान युद्ध के बीच पाकिस्तान की एक बड़ी साजिश बेनकाब हुई है. पाकिस्तान को लेकर खुलासा हुआ है कि वो उसने अपने एजेंट्स की मदद से भारत में सीसीटीवी लगवाए, जिनके जरिए वीडियो पाकिस्तान भेजे जा रहे थे. गाजियाबाद पुलिस ने पाकिस्तान की इस साजिश को नाकाम किया. पाकिस्तान ने इजरायल से सीख लेकर ऐसा किया. इजरायल ने तेहरान के ट्रैफिक कैमरों को हैक कर खामेनेई को लेकर अहम जानकारी जुटाई थी. देखें वीडियो.

डोनाल्ड ट्रंप ने पूरी दुनिया को कन्फ्यूज कर दिया है. एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप और उनके दावे हैं. वहीं दूसरी तरफ इन दावों को आंख दिखाती हकीकत. सवाल ये है कि जंग की बिसात पर ट्रंप कौन सा खेल खेल रहे हैं. जंग की शुरुआत से अबतक डोनाल्ड ट्रंप अपनी आदत के मुताबिक अपने बयान बदल रहे हैं. दुर्भाग्य ये है कि ये जंग है. पहले दिन से वो कह रहे हैं कि हम जीत रहे हैं. जंग के 25 दिन बाद हकीकत कुछ और है. लेकिन वो कह रहे हैं कि उन्होंने ईरान को खत्म कर दिया है. फिर दबाव बढ़ाने के लिए उन्होंने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया. वहीं अचानक ये कहकर दुनिया को चौंका दिया कि 5 दिन युद्धविराम. ट्रंप की इन बातों ने बता दिया है कि उनके दिमाग में घोर कन्फ्यूजन है.

पश्चिम एशिया में बिगड़े हालातों पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी की बातचीत हुई है. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर इसकी जानकारी दी. पीएम मोदी ने कहा है कि उन्हें ट्रंप का फोन आया और पश्चिम एशिया की स्थिति पर बात हुई. भारत तनाव कम करने और जल्द से जल्द शांति बहाल करने का समर्थन करता है. देखें वीडियो.

मोहम्मद बाघेर जोलघादर, ईरान के नए सुरक्षा रणनीतिकार होंगे. ईरान ने अली लारीजानी की जगह पर मोहम्मद बाघेर की नियुक्ति का ऐलान किया है. ईरान के सरकारी चैनल IRIB के मुताबिक सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने मोहम्मद बाघेर की नियुक्ति को मंजूरी दी है. ईरान का ये ऐलान ऐसे समय में हुआ है, जब बातचीत के राष्ट्रपति ट्रंप के एकतरफा ऐलान के बावजूद ईरान पलटवार से रुका नहीं. ईरान के हमलों से आज तेल अवीव में रिहाइशी इमारतों की बर्बादी की तस्वीरें आईं. उधर, इजरायल ने ईरान के खोर्रमशहर और इशफाहान में ऊर्जा केंद्रों पर हमले किए. इजरायल ने ईरान के कई शहरों में हमले किए हैं. बीती रात हुए हमलों से साफ है कि बातचीत के लिए 5 दिनों की जो मोहलत ट्रंप ने दी, उसका कोई नतीजा नहीं दिख रहा. इस बीच, वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब और UAE भी युद्ध में उतर सकते हैं. सवाल है कि इस युद्ध पर फुलस्टॉप कैसे लगेगा? क्या बातचीत के लिए ईरान को कथित तौर पर मोहलत देने का ट्रंप का दांव नाकाम है?








