
'एक देश एक चुनाव' का जिन्न बोतल से बाहर क्यों निकला?
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पार्लियामेंट का स्पेशल सेशन बुलाने के पीछे सरकार की असल मंशा क्या है, विपक्ष की महाबैठक से अबतक क्या ठोस निकला, सितंबर में कौन से ज़रूरी नियम बदलने जा रहे हैं और इस बदलाव का हमारे आपके जीवन पर क्या असर पड़ने वाला है? सुनिए 'आज का दिन' में.
दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन के आयोजन को लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है. इसके समापन के हफ़्ते भर बाद केंद्र सरकार ने 18 से 22 सितंबर के बीच संसद का विशेष सत्र आहूत किया है. संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने कल इस बात की जानकारी दी. बोले - 'अमृत काल' के बीच संसद में सार्थक चर्चा और बहस की उम्मीद है. इस सत्र में क्या एजेंडा होगा और किन मुद्दों पर चर्चा होगी, इसे लेकर सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक बयान या जानकारी सामने नहीं आई है. लेकिन सेशन की टाइमिंग को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बाज़ार गर्म है. उद्धव सेना गुट की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी से लेकर कांग्रेस सांसद दीपेंदर हुड्डा ने इस पर सवाल उठाए हैं.
तो संसद के इस स्पेशल सेशन को लेकर सरकार ने भले ही अपने पत्ते न खोले हों, लेकिन मीडिया में इस बात की चर्चा है कि इस विशेष सत्र में सरकार कुछ अहम बिलों को पेश कर सकती है, जिनमें एक देश-एक चुनाव बिल भी शामिल है. 2018 में लॉ कमीशन ने देश में सभी विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक साथ कराए जाने का समर्थन करते हुए एक रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी थी. साथ में ये भी कहा गया था कि संविधान के मौजूदा ढांचे के भीतर यह संभव नहीं है और इसके लिए आमूलचूल संशोधन की ज़रूरत पड़ेगी. ऐसे में 'एक देश-एक चुनाव' का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर क्यों निकल आया है, इंडिया जैसे देश में ये कितना प्रैक्टिकल और डूएबल है और स्पेशल सेशन को बुलाने के पीछे सरकार की क्या मंशा दिखती है? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें.
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मुंबई की एक लक्ज़री फाइव स्टार होटेल में ऑपोजिशन के I.N.D.I.A. गठबंधन की तीसरी बैठक कल शुरू हुई. इसमें 28 दलों के 63 नेता शामिल हुए. इससे पहले बेंगलुरु में जो मीटिंग हुई थी उसमें 26 पार्टियों ने हिस्सा लिया था. इस बैठक में दो और दल पीजेंट एंड वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया और महाराष्ट्र की MPP जुड़ी हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी-नीत एनडीए गठबंधन से लोहा लेने के लिए बने इस गठबंधन की ये तीसरी बैठक है. इससे पहले जून में पटना में पहली बैठक हुई थी, जबकि दूसरी बैठक बेंगलुरु में जुलाई के महीने में हुई थी. आज इस बैठक का आख़िरी दिन है. तो कल किन बिंदुओं पर विपक्ष ने मंथन किया और क्या बातें छनकर बाहर आईं, वन नेशन वन पोल को लेकर विपक्ष के बड़े नेता इसे कैसे देख रहे हैं और क्या आज विपक्ष कोई रोडमैप लेकर सामने आएगा? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें.
------------------------------------------------------------ साल 2023 अपने नौवें महीने में प्रवेश कर चुका है. अगस्त को विदा कर सितंबर आ धमका है. और इसकी आगत के साथ साथ आ गए हैं कुछ नए नियम. जिनका सीधा असर आपकी सैलरी से लेकर रसोई और शेयर बाजार में आपके इन्वेस्टमेंट तक पर पड़ने वाला है. इसके अलावा सितंबर का महीना ख़त्म होने से पहले कुछ जरूरी काम भी आपको निपटाने पड़ेंगे, नहीं तो आपका नुक़सान हो सकता है. तो कौन से नियम हैं जो आज से बदल गए हैं और इनका आपके ऊपर क्या असर रहने वाला है? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें.

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