
उस वक्त क्या होता है... प्लेन क्रैश में बचे कुछ खुशकिस्मत लोगों ने सुनाई आपबीती
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अहमदाबाद एयरपोर्ट पर आज हुए विमान हादसे की तरह ही दुनिया में ऐसे कई दुर्घटनाएं हुई हैं. कुछ हादसे ऐसे भी हुए हैं, जिसमें कोई यात्री या क्रू मेंबर जीवित नहीं बच पाया. वहीं कुछ ऐसी भी दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें किसी के बचने की कोई गुंजाइश नहीं थी, फिर भी कुछ लोग चमत्कारिक रूप से जीवित बच गए.
गुजरात के अहमदाबाद में आज एक बड़ा विमान हादसा हुआ है. एअर इंडिया का प्लेन अहमदाबाद एयरपोर्ट से लंदन के लिए टेकऑफ करने के तुरंत बाद क्रैश हो गया. इसमें कुल 242 लोग सवार थे. अभी तक इस हादसे में कितने लोग हताहत हुए हैं और कितने बच गए हैं, इसकी कोई सटीक जानकारी नहीं मिल पाई है.
यह कोई पहला विमान हादसा नहीं है. दुनिया में ऐसे कई हादसे हुए हैं. कुछ हादसे ऐसे हुए हैं, जिसमें कोई यात्री या क्रू मेंबर जीवित नहीं बच पाया. वहीं कुछ ऐसी भी दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें किसी के बचने की कोई गुंजाइश नहीं थी, फिर भी कुछ लोग चमत्कारिक रूप से जीवित बच गए. जानते हैं ऐसे ही कुछ भाग्यशाली लोगों के किस्से, जो प्लेन क्रैश होने पर भी बच निकले और बताया कैसा था वो मंजर?
लिलियाना एस्ट्राडा (2025) 17 मार्च 2025 को रोआटन, होंडुरास में दुर्घटनाग्रस्त हुए लाहंसा एयरलाइंस के विमान में जीवित बचे 5 लोगों में एक थी. उसने बताया कि वह प्लेन के पंख के पास बैठी थी. इस घटना में दो चालक दल के सदस्यों और 10 यात्रियों की जान चली गई थी. एस्ट्राडा ने कहा कि वह अपनी सीटबेल्ट हटाने में सफल रही और कैरेबियन सागर में दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद विमान से तैरकर दूर चली गई. उन्होंने बताया था कि जिस छोटे जेटस्ट्रीम 32 विमान में वह सवार हुई थी, वह पहले से ही तय समय से पीछे था. जब वह होंडुरास के कैरिबियन तट से उड़ान भरने के लिए तैयार था, तो उसे कुछ ठीक नहीं लगा. विमान टरमैक पर फिसल गया और फिर खतरनाक तरीके से हिल रहा था. तब उसने अपना फ़ोन निकाला और अपने बॉयफ्रेंड को एक टेक्स्ट मैसेज भेजा -कुछ गड़बड़ है. मैं तुमसे प्यार करती हूं.
ली से मोकपो (2024) 29 दिसंबर 2024 को रविवार को दक्षिण कोरिया के मुआन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दुर्घटनाग्रस्त हुए जेजू एयर विमान के एकमात्र जीवित यात्री फ्लाइट अटेंडेंट इस दुखद दुर्घटना को याद नहीं कर पा रहे हैं. इस हादसे में 179 लोगों की मौत हो गई थी और सिर्फ 2 लोग जिंदा बच पाए थे. जब 32 वर्षीय ली से मोकपो कोरियाई अस्पताल में अपनी चोटों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने जवाब में पूछा कि क्या हुआ? मैं यहां क्यों हूं? ली ने यह भी कहा कि उन्हें याद नहीं है कि विमान के उतरने के बाद क्या हुआ था और उन्हें याद है कि उन्होंने उतरने से पहले अपनी सीट बेल्ट बांध ली थी.
रुबेन वान असौव - (2010) लीबिया के त्रिपोली हवाई अड्डे के रनवे से कुछ ही दूर अफ्रीकिया एयरवेज एयरबस ए330 के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद नौ वर्षीय रूबेन वैन असौव एकमात्र जीवित बचा यात्री था. उनके पिता पैट्रिक, मां ट्रुडी और भाई एन्जो उन 103 लोगों में शामिल थे जिनकी मृत्यु हो गई.मलबे से बेहोशी की हालत में निकाले गए रूबेन की फ्रैक्चर्ड टांगों की सर्जरी की गई. अब वह नीदरलैंड में अपनी चाची और चाचा के साथ रहते हैं. कथित तौर पर देश में क्रांति के बाद हुई लड़ाई के कारण लीबिया लौटने की योजना रद्द कर दी गई थी.
बहिया बकरी (2009) 30 जून 2009 को कोमोरोस द्वीप समूह जा रहा यमनिया एयरवेज का एक विमान आसमान से नीचे गिरकर हिंद महासागर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया.बहिया बकरी इस यमनिया फ्लाइट -626 की एकमात्र जीवित बची यात्री थी. वह बचाए जाने से पहले नौ घंटे तक हिंद महासागर में मलबे से चिपकी रही.वह मात्र 12 साल की थी, मुश्किल से तैर पाती थी और उसके पास कोई लाइफ़ जैकेट भी नहीं थी, वह घंटों तक मलबे के एक टुकड़े से चिपकी रही, जब तक कि बचाव दल ने उसे ढूंढ़ नहीं लिया. उसकी टूटी हड्डियों के इलाज के लिए फ्रांस के अस्पताल ले जाया गया.उसे उठाए जाने के बाद उसे यकीन दिलाना पड़ा कि वास्तव में विमान दुर्घटना हुई थी. वह अभी भी सदमे की स्थिति में थी, उसे विश्वास था कि वह विमान की खिड़कियों पर अपना माथा बहुत ज़ोर से दबाने के कारण विमान से गिर गई थी.

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