
उत्तराखंड बना 'मुख्यमंत्री परिवर्तन' की प्रयोगशाला, 10 साल की सत्ता में 6 CM दे चुकी है BJP
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तमाम पार्टियों ने इस राज्य को 'मुख्यमंत्री परिवर्तन' की प्रयोगशाला बना दिया है. सीएम के खिलाफ नाराजगी तो इस्तीफा, भ्रष्टाचार के आरोप लगे तो इस्तीफा, चुनाव नजदीक तो भी इस्तीफा. सिर्फ मौके बदल जाते हैं लेकिन उत्तराखंड में मुख्यमंत्रियों का यूं बिना कार्यकाल पूरा करे बदले जाने का सिलसिला नहीं थमता.
उत्तराखंड में तीरथ सिंह रावत के इस्तीफे के बाद एक बार फिर पहाड़ी राज्य में अस्थिरता का दौर शुरू हो गया है. राज्य को चार महीने पहले ही नया मुख्यमंत्री मिला था, लेकिन अब उन्हें भी विदाई दे दी गई है. उत्तराखंड के 21 साल के इतिहास पर नजर दौड़ाएं तो समझ आता है कि तमाम पार्टियों ने इस राज्य को 'मुख्यमंत्री परिवर्तन' की प्रयोगशाला बना दिया है. सीएम के खिलाफ नाराजगी तो इस्तीफा, भ्रष्टाचार के आरोप लगे तो इस्तीफा, चुनाव नजदीक तो भी इस्तीफा. सिर्फ मौके बदल जाते हैं लेकिन उत्तराखंड में मुख्यमंत्रियों का यूं बिना कार्यकाल पूरा करे बदलन जाने का सिलसिला नहीं थमता.
आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

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