
इजरायल ने बेरूत के रिहायशी इलाकों में किए हवाई हमले, 18 की मौत, 92 घायल
AajTak
इजरायल ने गुरुवार की रात बेरूत के डाउनटाउन शहर में कई हवाई हमले किए. इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) के अनुसार, ये हमला रास एल नबेह, अल-नुवैरी के आसपास के इलाकों को निशाना बनाकर किया गया. इस हमले में 18 लोग मारे गए और 92 घायल हो गए.
इजरायल ने गुरुवार की रात बेरूत के डाउनटाउन शहर में कई हवाई हमले किए. इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) के अनुसार, ये हमला रास एल नबेह, अल-नुवैरी के आसपास के इलाकों को निशाना बनाकर किया गया. इस हमले में 18 लोग मारे गए और 92 घायल हो गए.
IDF ने कुछ ही मिनटों में कई रॉकेट दागे. स्थानीय लोगों ने हमले के बाद वीडियो बनाया, जिसमें इमारत से धुआं निकलता हुआ देखा गया और शहर में हर तरफ एंबुलेंस के सायरन की आवाज गूंज रही थी. ये हमला घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर किया गया. हमले में बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने की खबर है.
लेबनान में अब तक 2,169 लोगों की मौत लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि पिछले दिनों इजरायल के हवाई हमले में लेबनान में 28 लोगों की मौत हो गई और 113 लोग घायल हो गए. युद्ध की शुरुआत से अब तक लेबनान में 2,169 लोगों की जान चल गई और 10,212 लोग घायल हुए हैं. रिपोर्ट के अनुसार इस हमले में हिजबुल्लाह के संपर्क और समन्वय इकाई का प्रमुख वाफिक सफा टारगेट पर था. IDF दक्षिणी लेबनान में हिज्बुल्लाह आतंकवादी ढांचे के खिलाफ ग्राउंड लेवल पर छापेमारी कर रही है.
IDF ने छापेमारी में कई हथियार बरामद किए इस छापेमारी के दौरान IDF ने हिज्बुल्लाह आतंकवादी ढांचे को नष्ट कर दिया. साथ ही हथियारों को नष्ट करने की भी खबर है. सैनिकों ने लगभग 800 सैन्य जैकेट और सैकड़ों हथियार बरामद किए हैं. छापेमारी में ग्रेनेड, विस्फोटक, एके-47 जैसे हथियार बरामद किए गए हैं. सेना ने नागरिक घरों के अंदर रखे हथियारों के बक्से पाए, जिनमें गोला-बारूद और एक कोर्नेट मिसाइल लांचर रखा गया था. इसके अलावा दर्जनों तैयार मिसाइलें थीं, जो गैलिली में इजरायली समुदायों को टारगेट करने के लिए तैयार थीं. IDF ने गुरुवार सुबह लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों पर गोलीबारी की.
इजरायली सेना ने लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों पर गोलीबारी की UNIFIL के अनुसार, इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने गुरुवार सुबह लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों पर गोलीबारी की. इजरायल डिफेंस फोर्सेस की गोलाबारी में इजरायल और लेबनान के बीच तैनात यूएन (यूनाइटेड नेशंस) पीस कीपर घायल हो गए. इजरायल और लेबनान के बीच के एरिया को ब्लू लाइन के नाम से जाना जाता है. ये एक बफर जोन है जहां यूएन फोर्स तैनात है. इस गोलीबारी के बाद नाराज इटली ने इजरायल के सामने विरोध जताया है.

अमेरिका और ईरान में इस समय टकराव देखने को मिल रहा है. अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दे रहा है. अमेरिका का विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन समुद्र के रास्ते ईरान के करीब पहुंच चुका है जिससे ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं. हालांकि, अरब देश अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. लगातार धमकियों के बावजूद ईरान पर सीधे हमले से क्यों बच रहा अमेरिका? देखें श्वेतपत्र.

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं. अमेरिका का विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन समुद्र के रास्ते ईरान के करीब पहुंच चुका है जिससे ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं. वहीं अरब देश अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. दूसरी ओर, ईरान ने इजरायल के आठ प्रमुख शहरों पर हमले की योजना तैयार की है. इस बढ़ती तनाव की स्थिति से मध्य पूर्व में सुरक्षा खतरे और बढ़ सकते हैं.

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला करते हुए ट्रंप को ईरान में हुई मौतों, नुकसान और बदनामी के लिए जिम्मेदार ठहराया और उन्हें 'अपराधी' बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान में हालिया अशांति अमेरिका की साजिश है और ट्रंप ने खुद इसमें दखल देकर प्रदर्शनकारियों को उकसाया.

व्हाइट हाउस ने गाजा को फिर से बसाने और उस पर शासन के लिए बने 'बोर्ड ऑफ पीस' के सदस्यों की लिस्ट जारी की है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बोर्ड के अध्यक्ष होंगे. जबकि विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर सदस्य होंगे. देखें दुनिया आजतक.

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. अयातुल्ला अली खामेनेई की हुकूमत ने प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए फांसी जैसे खौफनाक कदम उठाने का फैसला किया तो अमेरिका ने सीधे एक्शन की चेतावनी दे डाली. हालांकि बाद में ईरान और ट्रंप के ताजा बयानों ने दुनिया को थोड़ी राहत दी. मगर ईरान संकट अब सिर्फ एक देश का नहीं, बल्कि वैश्विक टकराव का संकेत बनता जा रहा है.








