
इंडिया-EU डील की वो शर्त जिसने मुश्किल की TESLA की राह और दे दिया Tata-Mahindra को बूस्टर
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India-EU FTA Deal on EV: यूरोपीय यूनियन के अनुसार, यूरोप में बनने वाली गाड़ियों पर भारत में लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी को 110 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है. लेकिन इस डील में एक ऐसी शर्त भी शामिल है, जिसने TESLA जैसी विदेशी कार कंपनियों के लिए फिलहाल भारत में कम कीमत में कारों को लाने से रोक दिया है.
India-EU FTA Deal Impact on EV: भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA Deal) को हाल के वर्षों की सबसे बड़ी व्यापारिक डील माना जा रहा है. करीब दो दशक चली बातचीत के बाद यह समझौता ऐसे समय में सामने आया है, जब दुनिया की ऑटो इंडस्ट्री खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों के दौर में तेजी से आगे बढ़ रही है. इस डील का असर सिर्फ एक्सपोर्ट-इंपोर्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तय करेगा कि भारत में भविष्य की इलेक्ट्रिक कार इंडस्ट्री किस दिशा में जाएगी.
भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हुई इस ऐतिहासिक डील से भारत के 90 प्रतिशत से ज्यादा प्रोडक्ट पर टैरिफ और गैर-टैरिफ बैरियर्स के खत्म होने की उम्मीद है. इससे कपड़ा, लेदर, केमिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो और ज्वेलरी जैसे लेबर बेस्ड सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा. लेकिन एक बड़ा फायदा इंडियन कार मार्केट को भी मिलेगा, ख़ास तौर पर देशी इलेक्ट्रिक कार निर्माताओं को.
यूरोपीय यूनियन के अनुसार, यूरोप में बनने वाली गाड़ियों पर भारत में लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी को 110 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है. बता दें कि, अब तक इन इंपोर्टेड कारों पर 70 प्रतिशत से लेकर 110 प्रतिशत तक इंपोर्ट ड्यूटी लगती रही है. जो कि अलग-अलग प्राइस ब्रेकेट के अनुसार हर मॉडल पर भिन्न होता है.
फिलहाल भारत में 40,000 डॉलर से कम कीमत वाली इंपोर्टेड कारों पर करीब 70 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता है. वहीं, 40,000 डॉलर से ज्यादा कीमत वाली कारों पर यह टैक्स 110 प्रतिशत तक पहुंच जाता है. ऐसे में यूरोप से आने वाली ये कारें कम कीमत में भारत में उपलब्ध होंगी. हालांकि, शुरुआती दौर में इसके लिए एक कोटा फिक्स किया गया है, ये नियम केवल शुरुआती 2.5 लाख यूनिट पर ही लागू होगा. और इसमें वही वाहन शामिल होंगे जो कम्पलीट बिल्ट यूनिट (CBU) रूट से भारत लाए जाएंगे.
इस समझौते में एक ऐसी शर्त शामिल की गई है, जिसने अमेरिकी इलेक्ट्रिक कार कंपनी Tesla और कुछ अन्य विदेशी EV निर्माताओं की राह को फिलहाल मुश्किल बना दिया है. भारत ने यूरोप से आने वाली कारों पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने पर सहमति जताई है, लेकिन यह राहत सिर्फ पेट्रोल और डीजल इंजन वाली गाड़ियों तक सीमित रखी गई है. बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों यानी EVs को इस शुरुआती टैरिफ कटौती से बाहर रखा गया है. इसका सीधा मतलब यह है कि यूरोप में बनने वाली Tesla जैसी कंपनियों की इलेक्ट्रिक कारें अभी भी भारत में हाई इंपोर्ट ड्यूटी के साथ ही आएंगी.
सरकार का तर्क साफ है. भारत नहीं चाहता कि सस्ती या प्रीमियम विदेशी इलेक्ट्रिक कारें सीधे इंपोर्ट के रास्ते भारतीय बाजार पर हावी हो जाएं. खासकर तब, जब देश के अपने इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता इस सेक्टर में तेजी से निवेश कर रहे हैं. इसी सोच के तहत अगले 5 सालों तक इलेक्ट्रिक वाहनों पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी पहले की ही तरह जस की तस रहेगी. ताकि घरेलू कंपनियों को मजबूत होने का समय मिल सके.

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