
CAFE-3 नॉर्म्स की चुनौती! महंगी हो जाएंगी छोटी कारें, इतनी बढ़ सकती है कीमत
AajTak
CAFE 3 Norms Explained: एक आम आदमी जो पहली बार बाइक से कार पर अपग्रेड करने की सोचता है, तो उसकी विश लिस्ट में बड़ी गाड़ियां नहीं होती हैं. बल्कि एक ऐसी कार होती है, जो छोटी, कम मेंटेनेंस और ज्यादा फ्यूल एफिशिएंट हो. कैफे-3 नॉर्म्स को लेकर जो चर्चा हैं, उसे देखते हुए ऐसा लग रहा है कि आने वाले दिनों में छोटी गाड़ियां महंगी हो जाएंगी.
सितंबर 2025 में जीएसटी दरों में बदलाव किया गया, तो छोटी कारों के लिए ये संजीवनी से कम नहीं था. कभी भारतीय कार मार्केट की जान रहा ये सेगमेंट धीरे-धीरे बेजान हो चला था. लेकिन सितंबर 2025 में हुए जीएसटी बदलाव ने इस सेगमेंट को फिर से पंख दे दिए. सितंबर 2025 में हुई कटौती के बाद अक्टूबर में इस सेगमेंट की सेल दोगुनी हो गई.
हालांकि, अब एक बार फिर इस सेगमेंट पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं. इसकी वजह कैफे-3 नॉर्म्स (CAFE-3) हैं. मिनिस्ट्री ऑफ पावर ने पिछले महीने जानकारी दी थी कि कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी का प्रस्ताव प्रधानमंत्री कार्यालय को मंजूरी के लिए भेज रखा है. इन नियमों को लेकर ऑटो सेक्टर को कई तरह की चिंताएं हैं.
नए नियम अप्रैल 2027 से 2032 तक के लिए होंगे. सोशल मीडिया पर भी कैफे 3 नॉर्म्स को लेकर खूब चर्चा हो रही है. ये चर्चाएं क्या हैं और कैफे नॉर्म्स किस तरह से आम आदमी के ऊपर प्रभाव डाल सकता है, इसे समझने के लिए पहले हमें CAFE नॉर्म्स को समझना होगा.
इन नियमों को पैसेंजर व्हीकल्स की फ्यूल एफिशिएंसी बेहतर करने के लिए लाया जा रहा है. इसका मकसद गाड़ियों से निकलने वाले कार्बन डाइऑक्साइड को कम करना है. CAFE यानी कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी नॉर्म्स में किसी कंपनी की सभी गाड़ियों का एवरेज कार्बन उत्सर्जन देखा जाता है.
आसान भाषा में कहें, तो मान लीजिए किसी कंपनी के पोर्टफोलियो में कुल 10 गाड़ियां हैं. इसमें कुछ छोटी पेट्रोल कार होंगी, कुछ बड़ी और कुछ इलेक्ट्रिक कार्स भी हो सकती हैं. कैफे नॉर्म्स के तहत देखा जाता है कि इन सभी गाड़ियों के रोड पर चलने से कितना कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) निकल रहा है. ये नियम किसी एक मॉडल को नहीं देखते हैं. इसमें किसी कंपनी के सभी मॉडल्स को एक साथ देखा जाता है.
यह भी पढ़ें: CAFE-3 पर बड़ा दांव, गाड़ियों के माइलेज पर सख्त होगी सरकार! PMO भेजा गया प्रस्ताव

इलेक्ट्रिक गाड़ियों के साथ सबसे बड़ी चुनौती उन्हें चार्ज करने की होती है. रेंज एंजायटी जैसे शब्द इसी चिंता से निकले हैं, जहां लोगों को ये डर सताता रहता है कि जाने कब उनकी कार बंद हो जाए और उसे चार्ज कहां करेंगे. इसका निदान चीनी कंपनियां तेजी से खोज रही हैं. एक चीनी कंपनी ने सिर्फ 11 मिनट में फुल चार्ज होने वाली सोडियम-आयन बैटरी तैयार की है.












