
आर्मी के पूर्व चीफ जनरल सुंदरराजन पद्मनाभन का 83 साल की उम्र में निधन, चेन्नई में ली आखिरी सांस
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जनरल सुंदरराजन पद्मनाभन ने अगस्त 1975 से जुलाई 1976 तक एक स्वतंत्र लाइट बैटरी की कमान संभाली और बाद में सितंबर 1977 से मार्च 1980 तक गजाला माउंटेन रेजिमेंट की कमान संभाली.
पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल सुंदरराजन पद्मनाभन (General Sundararajan Padmanabhan) का 83 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्होंने चेन्नई में आखिरी सांस ली. 5 दिसंबर 1940 को केरल के त्रिवेंद्रम में जन्मे, वे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय भारतीय सैन्य कॉलेज (RIMC), देहरादून और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), खड़कवासला, पुणे के छात्र रह चुके हैं. जनरल सुंदरराजन पद्मनाभन ने 30 सितंबर 2000 को 20वें सेना अध्यक्ष के रूप में भारतीय सेना का कार्यभार संभाला था.
13 दिसंबर 1959 को भारतीय सैन्य अकादमी (IAM) से ग्रेजुएट होने के बाद उन्हें आर्टिलरी रेजिमेंट में कमीशन दिया गया था. उनके शानदार करियर में कई प्रतिष्ठित कमांड, स्टाफ और अनुदेशात्मक पोस्टिंग शामिल हैं, इसके अलावा उन्होंने कई ऑपरेशनों में भाग लिया था. उन्होंने 1973 में वेलिंगटन स्थित रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज (DSSC) और नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज (NDC) से स्नातक की उपाधि प्राप्त की.
कई युद्धों का रहे हिस्सा
जनरल सुंदरराजन पद्मनाभन ने अगस्त 1975 से जुलाई 1976 तक एक स्वतंत्र लाइट बैटरी की कमान संभाली और बाद में सितंबर 1977 से मार्च 1980 तक गजाला माउंटेन रेजिमेंट की कमान संभाली. यह पर्वतीय रेजिमेंट इंडियन आर्मी की सबसे पुरानी तोपखाना रेजिमेंटों में से एक है और इसने कई युद्धों में भाग लिया है.
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जनरल सुंदरराजन पद्मनाभन ने देवलाली में आर्टिलरी स्कूल में इंस्ट्रक्टर गनरी के रूप में काम किया, एक पैदल सेना ब्रिगेड के ब्रिगेड मेजर रहे और जनवरी 1983 से मई 1985 तक माउंटेन डिवीजन के कर्नल जनरल स्टाफ के तौर पर काम किया, जहां उन्हें विशिष्ट सेवा पदक (VSM) से सम्मानित किया गया. उन्होंने IMA में इंस्ट्रक्टर के रूप में भी दो कार्यकाल बिताए हैं.

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