
आम के व्यापार पर कोरोना का ग्रहण
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कोरोना की दूसरी लहर के दौरान पैदा दहशत से लखनऊ की 'मैंगों बेल्ट' के 30 फीसद बाग अभी तक नहीं बिक पाए. फ्लाइट बंद होने से विदेशों को आम निर्यात पर संशय. लगातार दूसरे वर्ष घाटा होने की आशंका से आम व्यापारियों में घबराहट.
लखनऊ से हरदोई रोड पर 40 किलोमीटर दूर मलिहाबाद के बड़ी कसमंडी इलाके के सैदासपुर गांव के रहने वाले कलिका रावत ने पिछले वर्ष कोरोना की पहली लहर के दौरान अपने दो बीघा बाग में 300 कैरेट आम पैदा किया था. एक कैरेट में 30 किलो आम आता है और इस तरह कलिका ने 9,000 किलो आम पैदाकर साल भर के लिए अपने संयुक्त परिवार का पेट भरने का इंतजाम कर लिया था. लेकिन पिछले वर्ष लाकडाउन के चलते आम मंडी मे 500 रुपए प्रति कैरेट के हिसाब से आम बेचना पड़ा. इस वर्ष कलिका को सब कुछ सामान्य रहने पर आम के अच्छे दाम मिलने की उम्मीद थी लेकिन कोरोना की दूसरी लहर के बीच चल रहे लॉकडाउन ने आम के किसानों के माथे पर पसीना ला दिया है. मलिहाबाद फल मंडी के अध्यक्ष नसीम बेग बताते हैं कि पिछले साल कोरोना संक्रमण के चलले लगे लाकडाउन के कारण आम के व्यापार में करीब एक हजार करोड़ का नुकसान हुआ था. नसीम बेग बताते हैं, “फसल सामान्य रहने पर आम तौर पर 17 से 20 मई के बीच बाग में आम तोड़ने की प्रक्रिया यानी आम टूट शुरू हो जाती है. इस बार भी 24 तक लाकडाउन लाकडाउन लगने के कारण इसके बाद ही आम की टूट शुरू हो पाएगी.”
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