
आपातकाल@50: 'हर हफ्ते 300 लोग नसबंदी के लिए...", जामा मस्जिद के पास नसबंदी कैंप चलाने वाली रुखसाना सुल्ताना की कहानी
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बड़े काले चश्मे और स्टाइलिश सूट के लिए मशहूर रुखसाना सुल्ताना ने जामा मस्जिद के पास पुरानी दिल्ली के दुजाना हाउस में एक कुख्यात नसबंदी केंद्र चलाया. ये ऑपरेशन बहुत विवादित रहा. और तब स्थानीय लोगों और पुलिस के बीच यहां कई झड़पें हुईं.
25 जून 1975, वो तारीख जब इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा की थी. देश के इतिहास को बदल देने वाली इस घटना के आज 50 साल पूरे हो गए. 50 साल वो समय होता है जब एक देश की दो पीढ़ियां लोकतंत्र के अनुभव हासिल कर परिपक्व हो चुकीं होती हैं. आज देश इस तारीख को याद कर इसके सबक को आत्मसात कर रहा है.
स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे काला अध्याय 25 जून 1975 की मध्य रात्रि को आपातकाल की घोषणा के साथ लिखा गया था, लेकिन ये इतना अचानक नहीं था. इसकी प्रस्तावना तो तब ही लिख दी गई थी जब इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उसी वर्ष 12 जून को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के रायबरेली से निर्वाचन को अमान्य घोषित कर दिया था.
ऑल इंडिया रेडियो पर इंदिरा की आवाज
25 जून, 1975 को ऑल इंडिया रेडियो पर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की आवाज गूंजी, "राष्ट्रपति ने आपातकाल की घोषणा की है," इंदिरा ने इसे "आंतरिक अशांति" के खिलाफ ढाल के रूप में प्रचारित किया. इंदिरा की ये घोषणा एक तानाशाही युग, आतंक के शासन की शुरुआत थी.
प्रधानमंत्री के बेटे संजय गांधी हालांकि किसी आधिकारिक पद पर नहीं थे. लेकिन उन्होंने आंतरिक सुरक्षा अधिनियम (MISA) के तहत गिरफ़्तारियों की पहली लहर की योजना बनाई. भोर की किरणें निकलते-निकलते मोरारजी देसाई, अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी सहित 600 से ज़्यादा दिग्गज विपक्षी नेताओं को हिरासत में ले लिया गया. बंसीलाल की हरियाणा पुलिस दिल्ली में छापेमारी कर रही थी. इस पुलिस के निशाने पर थे राजनेता, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता.
यह सुनिश्चित करने के लिए कि गिरफ़्तारियों की खबर आम लोगों तक न पहुंचे सरकार ने दिल्ली के प्रिंटिंग प्रेस की बिजली काटने के आदेश जारी किए, जिससे कई अखबारों का प्रकाशन ही नहीं हो पाया.

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