
आदिवासी दुल्हन, दान की जमीन और हावी होता दीन...झारखंड के इस इलाके में खतरनाक खेल!
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देश की राजधानी नई दिल्ली से सैकड़ों किलोमीटर दूर झारखंड के आदिवासी इलाकों में काफी कुछ ऐसा चल रहा है, जिसे संदेह की नजर से देखना जरूरी हो जाता है. ये इलाके देश के बॉर्डर पर तो नहीं हैं, लेकिन उन हिस्सों से सीधे जुड़े हैं, जहां अक्सर सीमा-पार से होने वाली गतिविधियों की खबर आती है. ऊपर से देखने पर सब सामान्य, लेकिन सतह के नीचे जैसे काफी कुछ खदबदा रहा हो. कुछ ऐसा, जो खतरे की आहट-सा लगता है. इस मामले की पड़ताल हमें 17 सौ किलोमीटर दूर ले गई.
स्पेनिश टूरिस्ट से हुए गैंगरेप ने झारखंड के दुमका को ग्लोबल मैप पर ला दिया. हर कोई आदिवासी-बहुल इलाके की बात कर रहा है. लेकिन ये नाम पहले भी गुमनाम नहीं था. दुमका समेत कई जिले हैं, जिनके बारे में कहा जा रहा है कि बांग्लादेशी मुसलमान न केवल आ रहे, बल्कि घर-बार तक बसा रहे हैं. कुछ आदिवासी नेताओं ने डर जताया कि जल्द ही उनकी बेटियों से लेकर जमीनें तक खत्म हो जाएंगी.
इस डर में कितनी सच्चाई है? क्या इतना आसान है सीमा के उस पार से इस पार आकर बस जाना? क्या ये कथित घुसपैठ, महज रोटी-कपड़ा-मकान जैसी बेसिक जरूरतों के लिए हो रही है या एक पूरा तंत्र स्थापित हो चुका है जो इलाके की डेमोग्राफी बदलकर एक बड़े खतरे की वजह बन सकता है? ऐसे कई सवालों का जवाब तलाशने की कोशिश हमें संथाल-परगना के तीन जिलों तक ले गई. पढ़िए, इस पड़ताल का पहला हिस्सा.
साहिबगंज का गोंडा पहाड़.
दिसंबर 2022 में यहां एक आंगनबाड़ी के पास इंसानी पैर का टुकड़ा दिखा, जिसे कुत्ते नोंच रहे थे. पास ही एक घर में बोरे में बंद मांस के टुकड़े बरामद हुए. ये रूबिका पहाड़िया की लाश थी. वो आदिवासी महिला, जिसने करीब एक महीने पहले ही दिलदार अंसारी से शादी की थी.
दिलदार की ये दूसरी शादी थी. पहली पत्नी साथ ही रहती थी, जिस बारे में रूबिका को पहले पता नहीं था. झगड़े शुरू हुए और महीनेभर के भीतर ही रूबिका की खौफनाक हत्या हो गई. तफ्तीश में ये भी सामने आया कि मारने के बाद लड़की की लाश से खाल अलग कर दी गई थी ताकि पहचान न हो सके.
पति समेत बाकी दोषी फिलहाल जेल में हैं, लेकिन दसियों टुकड़ों में बंटी युवती एक थ्योरी को बल दे गई. थ्योरी जो दक्षिणपंथी राजनीति में सबसे ज्यादा जोर-शोर से उछाली जाती है. लव जिहाद की थ्योरी.

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