
आज बीजेपी के हो जाएंगे चंपाई सोरेन... ताजपोशी-इस्तीफा-बगावत और ब्रेकअप... 6 महीने में क्या-क्या हुआ?
AajTak
चंपाई सोरेन 7 बार के विधायक हैं और सरायकेला से चुनाव जीतते आ रहे हैं. वे झारखंड की राजनीति में कोल्हान टाइगर नाम से भी जाने जाते हैं. चंपाई का कोल्हान इलाके की 14 विधानसभा सीटों पर खासा प्रभाव है. इससे पहले 21 अगस्त को चंपाई ने नई पार्टी बनाने का ऐलान किया था. उन्होंने 1991 में पहली बार निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीता था.
झारखंड की राजनीति में आज का दिन काफी खास है. यहां की पॉलिटिक्स में दो बड़े बदलाव होने जा रहे हैं. पहला, पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज आदिवासी नेता चंपाई सोरेन अपने बेटे बाबूलाल के साथ बीजेपी में शामिल होंगे. रांची के शहीद मैदान में दोपहर तीन बजे सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम होने जा रहा है. दूसरा, हेमंत सोरेन सरकार में चंपाई सोरेन की जगह घाटशिला के JMM विधायक रामदास सोरेन कैबिनेट मंत्री बनेंगे. ये कार्यक्रम सुबह 10.30 बजे राजभवन में होगा. ये दोनों राजनीतिक घटनाक्रम झारखंड की राजनीति के लिहाज से काफी अहम माने जा रहे हैं. क्योंकि यहां इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं और सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा के सामने बीजेपी कड़ी टक्कर पेश कर रही है. खुद सीएम हेमंत सोरेन विवादों में घिरे हैं. ऐसे में उनके सामने अपने कोर वोटर्स आदिवासी वर्ग को संभाले रखने और विपक्ष से निपटने की कड़ी चुनौती है. आइए जानते हैं कि झारखंड में 6 महीने में कैसे राजनीतिक हालात बदल गए?
दरअसल, झारखंड की राजनीति में पिछले 6 महीने के दरम्यान काफी कुछ बहुत तेजी से बदलते देखा जा रहा है. यूं कह सकते हैं कि झारखंड में 31 जनवरी के बाद राजनीति में उथल-पुथल मची है. पहले हेमंत सोरेन का इस्तीफा और गिरफ्तारी, फिर चंपाई सोरेन की ताजपोशी और 5 महीने बाद ही हेमंत की रिहाई ने पार्टी के अंदर बगावत और ब्रेकअप की दीवार खड़ी कर दी है. चंपाई सोरेन ने एक दिन पहले ही पार्टी, पद और विधायकी छोड़ दी है. वे हेमंत के रवैये से खफा हैं.
चंपाई 7 बार के विधायक हैं और सरायकेला से चुनाव जीतते आ रहे हैं. वे झारखंड की राजनीति में कोल्हान टाइगर नाम से भी जाने जाते हैं. चंपाई का कोल्हान इलाके की 14 विधानसभा सीटों पर खासा प्रभाव है. इससे पहले 21 अगस्त को चंपाई ने नई पार्टी बनाने का ऐलान किया था. उन्होंने 1991 में पहली बार निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीता था. उसके बाद 1995 में JMM के टिकट पर चुनाव लड़कर जीते. चंपाई ने JMM सुप्रीमो शिबू सोरेन की अगुवाई में झारखंड आंदोलन (अलग राज्य की मांग) में हिस्सा लिया और आदिवासियों के हक की लड़ाई लड़कर खुद की अलग पहचान बनाई. वे ट्रेड यूनियन के नेता भी रहे और औद्योगिक शहर जमशेदपुर और आदित्यपुर में कई व्यापारिक आंदोलन चलाए. चंपाई को शिबू सोरेन का वफादार भी माना जाता है. 31 जनवरी को प्रवर्तन निदेशालय ने जब हेमंत सोरेन को भूमि घोटाले में गिरफ्तार किया, तब चंपाई को विधायक दल का नया चुना नेता गया और उन्होंने 2 फरवरी को झारखंड के 12वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली.
6 महीने में कैसे बदल गए राजनीतिक हालात?
दरअसल, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खनन लीज के आवंटन में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हैं. प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग में पूछताछ के बाद हेमंत को 31 जनवरी की रात गिरफ्तार किया था. उन्होंने जेल जाने से पहले सीएम पद से इस्तीफा दिया था. करीब 5 महीने बाद हेमंत को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई और वो रिहा हो गए. ऐसे में चंपाई को सीएम की कुर्सी छोड़नी पड़ी और 4 जुलाई को एक बार फिर हेमंत ने सीएम पद की शपथ ली.
जब विधानसभा में खुद को कहा- गर्व से कहता हूं हेमंत पार्ट-2 हूं...

आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









