
आज का दिन: शहरों की हवा पर कितनी भारी पड़ी बीती रात की आतिशबाज़ी?
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शहरों की हवा पर कितनी भारी पड़ी बीती रात की आतिशबाज़ी? केरल में क्यों हो रहा मुख्यमंत्री-राज्यपाल के बीच टकराव? राजस्थान में कैसे अपना सियासी कद दिखाने में जुटे हैं सचिन पायलट? और क्या बीजेपी वसुंधरा राजे को फिर देगी मौका?, सुनिए 'आज का दिन' में.
दीवाली जश्न का दिन होता है. और इस जश्न को मनाने के लिए की गई आतिशबाज़ी बढ़ाती है मुसीबत. पिछले कई सालों का रिकॉर्ड है कि प्रदूषण में ख़तरनाक स्तर की बढ़ोतरी हो जाती है. महानगरों में कई जगह सांस के मरीजों के लिए दिक्कत बढ़ जाती है. आज की सुबह का हाल कभी दिल्ली वालों से पूछिएगा. गैस चेंबर बन जाती है दिल्ली. वैसे पिछले साल की ही तरह दिल्ली में इस बार पटाखे बैन जरूर थे लेकिन आसपास के इलाकों में हुई आतिशबाज़ी से दिल्ली की हवा बच नहीं सकी, तो और जगहों पर क्या हाल रहा और किस तरह की स्थिति रही? केरल में क्यों भिड़ गए हैं राज्यपाल और मुख्यमंत्री?
इन दिनों राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच टसल की ख़बरें बढ़ गई हैं. पश्चिम बंगाल, पंजाब के बाद अब इस लिस्ट में शामिल हुआ है राज्य केरल. अजीब है कि राज्यपाल के पद को संवैधानिक पद का दर्जा है और इस पर लोग सीधे हमले से बचते हैं , पर केरल के सरकार के मंत्री आक्रामक हैं. हालांकि राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान भी उसी तरह केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की सरकार पर वैसे ही हमले कर रहे हैं. शिक्षा नीति से शराब की पॉलिसी तक राज्यपाल केरल की सरकार की आलोचना कर रहे हैं. कल ये विवाद और चरम पर पहुँच गया जब उन्होंने नौ यूनिवर्सिटीज़ में राज्य सरकार की ओर से अपॉइंटेड कुलपतियों से इस्तीफा मांग लिया. हालांकि इनमें से किसी का इस्तीफा हुआ तो नहीं पर टकराव की स्थिति बनी हुई है. सवाल ये है कि केरल में राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच ये जो विवाद है ये कहां से शुरू हुआ और क्यों ये इस स्तर तक आ पहुंचा?
क्या राजस्थान में फिर वसुंधरा राजे को मौका देगी बीजेपी?
कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव और राजस्थान पॉलिटिक्स की हलचल किस तरह से इंटरकनेक्ट रही ये बीते दिनों सबने देखा. गहलोत अंत वक्त में मुकर गए और कुर्सी बचाने में सफल रहे जो पायलट को जाती दिख रही थी. यहाँ अगले ही साल चुनाव हैं तो ज़ाहिर है अब ये दोनों नेता अपने अपने राजनीतिक वजूद को बढ़ाने और दिखाने के लिए जुटेंगे. गहलोत के साथ पार्टी के स्थानीय स्तर पर समर्थन की बात कही जाती है तो पायलट पर दिल्ली का हाथ बताया जाता है. लेकिन सारा मामला निर्भर करेगा जनता पर. ऐसा ही बीजेपी में भी चल रहा है. कहा जा रहा है कि राजस्थान में बीजेपी वसुंधरा राजे से आगे सोचने लगी है. राजे के अलावा कई और नेता हैं जो पार्टी का चेहरा बन सकते हैं. हालांकि इन सब बातों के बीच राजे ऐक्टिव जरूर हो गई हैं. प्रदेश के दौरे कर रही हैं, रोडशो और रैलियां अटेंड कर रही हैं. लेकिन बीजेपी राजस्थान के अध्यक्ष सतीश पुनिया या केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत के सामने उनकी राह उतनी आसान नहीं. ऐसे में क्या बीजेपी राजे से आगे बढ़ कर किसी और को मौका देगी? और क्या चुनावों में हमें कोई इस बार नया समीकरण दिख सकता है?
इन ख़बरों पर विस्तार से चर्चा के अलावा ताज़ा हेडलाइंस, देश-विदेश के अख़बारों से सुर्खियां, आज के दिन की इतिहास में अहमियत सुनिए 'आज का दिन' में अमन गुप्ता के साथ.
25 अक्टूबर 2022 का 'आज का दिन' सुनने के लिए यहां क्लिक करें.

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