
अवैध अप्रवासियों की ब्रिटेन में No Entry... ऋषि सुनक ने बनाया जहाज पर रखने का प्लान
AajTak
ब्रिटेन की सरकार अवैध प्रवासियों पर काफी सख्ती दिखा रही है. ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने कहा है कि अवैध प्रवासियों को अब होटलों के बजाए जहाजों पर रखा जाएगा. सरकार एक कानून भी लेकर आई है जिसके जरिए उसे अवैध प्रवासियों को हिरासत में लेने और उन्हें निर्वासित करने का अधिकार मिल जाएगा.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने अवैध प्रवासियों को चेतावनी देते हुए कहा है कि अब उन्हें टैक्सपैयर्स के पैसों पर होटलों में नहीं रखा जाएगा बल्कि वो जहाजों पर रखे जाएंगे. सोमवार को सुनक ने अवैध प्रवासियों पर भड़कते हुए कहा कि उन्हें जितना दिया जाना चाहिए, ब्रिटेन की सरकार उन्हें उससे कहीं अधिक दे रही है इसलिए वो होटलों में शेयरिंग रूम में रखे जाने को लेकर प्रदर्शन न करें.
सुनक ने दावा किया कि 'स्टॉप द बॉट' का उनका प्लान काम कर रहा है और अवैध प्रवासियों को अब नावों पर रखा जाएगा.
सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुनक ने दावा किया कि अवैध प्रवासियों को रोकने के लिए उनकी योजना 'स्टॉप द बोट' काम कर रही है. उन्होंने कहा कि इस महीने के अंत तक अवैध प्रवासियों को रखने के लिए एक जहाज तैयार हो जाएगी. इसके बाद एक हजार और प्रवासियों को रखने के लिए दो और जहाज मंगाए जाएंगे.
भारतीय मूल के सुनक ने कहा, 'मैं आपसे वादा किया था कि हम अवैध प्रवासियों को होटलों से बाहर निकालेंगे, और सैन्य सुविधाओं सहित वैकल्पिक जगहों पर उन्हें ले जाएंगे.'
सुनक ने आगे कहा, 'स्थानीय लोगों पर दबाव कम करने के लिए, हम उन्हें जहाजों पर भी रखेंगे. इस तरह का पहला जहाज अगले पखवाड़े में हमें मिल जाएगा. हमने दो और जहाज मंगाए हैं जिसमें एक हजार अवैध प्रवासियों को रखा जाएगा.'
उन्होंने बताया कि अवैध प्रवासन बिल या 'स्टॉप द बोट्स' बिल को हाउस ऑफ कॉमन्स ने अपनी मंजूरी दे दी है. यह कानून ऋषि सुनक की सरकार को अवैध रूप से देश में घुसने वाले प्रवासियों को हिरासत में लेने और उन्हें निर्वासित करने का अधिकार देगा.

अमेरिका और ईरान में इस समय टकराव देखने को मिल रहा है. अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दे रहा है. अमेरिका का विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन समुद्र के रास्ते ईरान के करीब पहुंच चुका है जिससे ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं. हालांकि, अरब देश अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. लगातार धमकियों के बावजूद ईरान पर सीधे हमले से क्यों बच रहा अमेरिका? देखें श्वेतपत्र.

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं. अमेरिका का विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन समुद्र के रास्ते ईरान के करीब पहुंच चुका है जिससे ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं. वहीं अरब देश अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. दूसरी ओर, ईरान ने इजरायल के आठ प्रमुख शहरों पर हमले की योजना तैयार की है. इस बढ़ती तनाव की स्थिति से मध्य पूर्व में सुरक्षा खतरे और बढ़ सकते हैं.

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला करते हुए ट्रंप को ईरान में हुई मौतों, नुकसान और बदनामी के लिए जिम्मेदार ठहराया और उन्हें 'अपराधी' बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान में हालिया अशांति अमेरिका की साजिश है और ट्रंप ने खुद इसमें दखल देकर प्रदर्शनकारियों को उकसाया.

व्हाइट हाउस ने गाजा को फिर से बसाने और उस पर शासन के लिए बने 'बोर्ड ऑफ पीस' के सदस्यों की लिस्ट जारी की है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बोर्ड के अध्यक्ष होंगे. जबकि विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर सदस्य होंगे. देखें दुनिया आजतक.

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. अयातुल्ला अली खामेनेई की हुकूमत ने प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए फांसी जैसे खौफनाक कदम उठाने का फैसला किया तो अमेरिका ने सीधे एक्शन की चेतावनी दे डाली. हालांकि बाद में ईरान और ट्रंप के ताजा बयानों ने दुनिया को थोड़ी राहत दी. मगर ईरान संकट अब सिर्फ एक देश का नहीं, बल्कि वैश्विक टकराव का संकेत बनता जा रहा है.








